IMG_20260124_200231
previous arrow
next arrow

चमचे और चमचों की गाथा

IMG_20251207_105330
previous arrow
next arrow

लघु कथा

अंग्रेज जब भारत में आए तो अपने साथ चमचा लेकर आए। उन्हे हाथ से खाना नहीं आता था।

अंग्रेजो ने चमचे के दम पर 200 साल राज किया। जमकर चमचों का इस्तेमाल किया उन्होने।

\"\"

बड़े बड़े खिताबों से नवाजा गया चमचों को, लोहे से लेकर सोने-चांदी के हीरे जड़े चमचे तैयार किए गए। साम-दाम-दंड-भेद प्रक्रिया को अपनाया।

चमचों के साथ छुरी कांटे का भी जमकर इस्तेमाल किया और सोने की चिड़िया को खोखला कर दिया। इस दुष्कृत्य में चमचों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अंग्रेज चले गए लेकिन चमचा छोड़ गए। चमचा संस्कृति आजाद भारत की उर्वरा भूमि में बड़ी तीव्रता से पुष्पित पल्लवित हूई।

चमचों ने मालिक बदल दिए, अंग्रेजों के द्वारा इस्तेमाल किए गए चमचों की मांग ज्यादा थी क्योंकि उन्हे राज काज का सारा गुर मालूम था। इसलिए चमचों ने अपनी उपयोगिता को बनाए रखा।

चमचे सर्वव्यापक हैं और सर्वव्याप्त हैं। आप सत्ता के गलियारों में कहीं भी जाएं,हर जगह चमचे तैनात मिलेंगे। अगर आपको कोई सही काम भी करवाना है तो चमचों से ही सम्पर्क साधना पड़ेगा।

कभी भी आपने बिना चमचे की स्वीकृति से काम कराने की कोशिश की तो वे आपका बना बनाया रायता फ़ैला देंगे। कोई काम नहीं हो पाएगा। इसलिए पहले चमचे को साधना जरुरी है।

आजकल विदेश जाने वाले कलमघीसूओं द्वारा चमचे चोरी करने का मामला भी मस्त बिंदास चमचमा रहा है।

साभार– सोशल मीडिया

Share from A4appleNews:

Next Post

हिमाचल टीम कायक प्रतियोगिता के सेमी फाइनल में पहुंची

Fri Jan 12 , 2018
हिमाचल प्रदेश कायकिंग एंड क्नोइंग एसोसिएशन के राज्य महासचिव पदम सिंह गुलेरिया ने बताया कि मध्यप्रदेश भोपाल में चल रही 28वीं राष्ट्रीय कायकिंग एंड क्नोइंग प्रतियोगिता के टीम मैनेजर इशान अख़्तर के कुशल नेतृत्व में हिमाचल टीम कायक प्रतियोगिता के सेमी फाइनल में पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि हिमाचल […]

You May Like