एप्पल न्यूज, शिमला
हिमाचल प्रदेश पुलिस महकमे में इन दिनों एक बड़ा प्रशासनिक विवाद सतह पर आ गया है। यह विवाद राज्य के दो शीर्ष अधिकारियों — पुलिस महानिदेशक (DGP) अतुल वर्मा और शिमला के एसएसपी संजीव कुमार गांधी — के बीच गहराता दिख रहा है।
विवाद की मुख्य जड़ हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमयी मौत की जांच है, जिसे लेकर दोनों अधिकारियों के दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली में भारी मतभेद सामने आए हैं।

1. ईमानदारी पर सवाल और इस्तीफे की चेतावनी
एसएसपी संजीव गांधी ने एक पत्रकार वार्ता में कहा कि उन्होंने अपने 25-26 वर्षों के पुलिस करियर में हमेशा ईमानदारी और निष्ठा से काम किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई उनकी पेशेवर ईमानदारी पर सवाल उठाता है, तो वे पुलिस सेवा से इस्तीफा देना पसंद करेंगे। उनका कहना था कि डीजीपी द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत हलफनामे में उनकी जांच को गलत ढंग से पेश किया गया है।
2. विमल नेगी केस — दोबारा कोर्ट जाने की तैयारी
गांधी ने कहा कि उनकी टीम द्वारा की गई जांच को संरक्षित करने और सही तथ्यों को सामने लाने के लिए यह मामला दोबारा कोर्ट में ले जाया जाएगा। वे इसे “न्याय की लड़ाई” बताते हुए कह रहे हैं कि विमल नेगी को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है।
3. मिडल बाजार गैस ब्लास्ट — एनएसजी रिपोर्ट का दुरुपयोग
गांधी ने आरोप लगाया कि शिमला के मिडल बाजार में हुए गैस ब्लास्ट को एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर आतंकी हमला घोषित करने की कोशिश की गई थी।
हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि यह ब्लास्ट सिर्फ एलपीजी रिसाव के कारण हुआ था, न कि आरडीएक्स से। इसके बावजूद डीजीपी ने मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखकर एसपी पर लापरवाही और सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया।
गांधी ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि एनएसजी जैसी एजेंसियों का राजनीतिक या प्रशासनिक उद्देश्य से इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
4. सीआईडी की गोपनीय सूचना लीक — डीजीपी के निजी स्टाफ पर आरोप
गांधी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि शिमला पुलिस की जांच में यह सामने आया कि सीआईडी विभाग की एक गोपनीय चिट्ठी को डीजीपी के निजी स्टाफ द्वारा लीक किया गया।
- इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
- लेकिन डीजीपी ने इसकी जांच में बाधा डालने के प्रयास किए।
5. कोर्ट को गुमराह करने का आरोप
एक अन्य गंभीर आरोप यह लगाया गया कि डीजीपी ने सीआईडी में रहते हुए एक जूनियर अधिकारी से एक मनमाफिक रिपोर्ट तैयार करवा कर कोर्ट को गुमराह किया।
गांधी ने कहा कि इस पर भी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
6. ड्रग तस्करी मामले में निजी स्टाफ की संलिप्तता
एसएसपी ने खुलासा किया कि हिमाचल में चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के खिलाफ चलाए गए अभियान में एक संजय भूरिया गिरोह की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि डीजीपी के निजी स्टाफ का एक कर्मचारी इस गिरोह से जुड़ा हुआ है।
- इस मामले में सेशन कोर्ट में जांच के लिए अनुमति मांगी गई है।
- गांधी ने कहा कि जब डीजीपी का कार्यालय ऐसे तत्वों से जुड़ा हो, तो एसपी का कर्तव्य बनता है कि वह जनता को सचेत करे।
7. मानहानि मुकदमा — सुधीर शर्मा (भाजपा विधायक) के खिलाफ मामला
गांधी ने बताया कि उन्होंने भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है।
- यह मुकदमा 21 मई को हाईकोर्ट की कार्यवाही के एक वीडियो क्लिप को कथित रूप से वायरल करने के आरोप में किया गया है।
हिमाचल पुलिस तंत्र में गंभीर मतभेद
यह विवाद केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस महकमे की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और न्याय प्रक्रिया पर व्यापक सवाल खड़े करता है।
- एसएसपी संजीव गांधी की प्रेस वार्ता से यह साफ होता है कि वे व्यवस्था में सुधार और सच्चाई सामने लाने की मांग कर रहे हैं।
- वहीं डीजीपी के ऊपर लग रहे आरोप बेहद संवेदनशील हैं और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
यदि यह मामला जल्द नहीं सुलझा, तो इससे राज्य पुलिस की छवि और जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है।







