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“स्फूर्ति” से लाहौल में पारम्परिक उद्योगों को लगेंगे पँख, SDM ने किया आगाज़

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कलस्टर बनाकर पारम्परिक उद्योगों को बढ़ावा देने की है योजना
-केलांग में जुटे 150 से ज्यादा पारम्परिक कारीगर


एप्पल न्यूज, लाहौल
हिमाचल में पारम्परिक उद्योगों के पुनरुत्थान और कारीगरों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार “पारंपरिक उद्योगों के पुनरुत्थान के लिए निधि योजना (SFURTI)” के अंतर्गत कार्यशालाओं का आयोजन कर रही है।

इसी कड़ी में, 23 जून 2025 को लहौल में SFURTI योजना पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर SDM केलंग आकांक्षा ने विशेष तौर पर शिरकत की और स्फूर्ति योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि परम्परागत उद्योगों से जुड़े छोटे कारीगरों की आर्थिकी में सुधार किया जाये और लघु उद्योगों का विकास किया जायेगा।

आकांक्षा नें कहा की लाहौल के लोग काफ़ी मेहनती है. उन्होंने लोगों, ख़ासकर महिलाओँ से आग्रह किया की वे सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे आये।

उन्होंने कहा की स्फूर्ति योजना लहौल में महिलाओं के सशक्तिकरण में मददगार साबित होगी।
इस मौके पर महाप्रबंधक ज़िला उद्योग केंद्र केलांग सन्नी ग्रेक ने बताया कि हिमाचल प्रदेश उद्योग विभाग, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) और NABCON के साथ मिलकर, राज्य के सभी 12 जिलों में इन कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है।

इसी क्रम में सोमवार को लाहौल में ग्रामीण एवं पारंपरिक कार्यबल के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता के क्षेत्र को विकास मिलेगाI
उन्होंने कहा कि स्फूर्ति योजना का लक्ष्य पारंपरिक उद्योगों एवं कारीगरों को समूहों (क्लस्टर) में संगठित करना, उन्हें उन्नत उपकरण, लक्षित प्रशिक्षण तथा बेहतर विपणन सुविधाएँ प्रदान करना है, ताकि उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ हो सके और सतत आजीविका सुनिश्चित की जा सके।
कार्यशाला में लाहौल के पारम्परिक उद्योगों से जुड़े 150 से अधिक स्थानीय कारीगरों समेत स्वयं सहायता समूह, पंचायत प्रधान, उपप्रधानों ने भाग लिया. कार्यशाला में आये कारीगरों ने इस दौरान अपने अनुभव भी साझा किये।
वहीं कार्यशाला में वन विभाग अधिकारी अंकित भावने ने कहा कि स्फूर्ति योजना का लक्ष्य पारंपरिक उद्योगों एवं कारीगरों को समूहों (क्लस्टर) में संगठित करना, उन्हें उन्नत उपकरण, लक्षित प्रशिक्षण तथा बेहतर विपणन सुविधाएँ प्रदान करना है, ताकि उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ हो सके और सतत आजीविका सुनिश्चित की जा सके।
यह योजना न केवल कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है, बल्कि उन्हें व्यापक बाजारों से भी जोड़ती है। राज्य भर में आयोजित की जा रही इन कार्यशालाओं के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के कारीगर भी इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।
इके आलावा कार्यशाला में प्रबंधक ज़िला उद्योग केंद्र केलांग राजेश शर्मा और सीनियर प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर बासिल फिलिप समेत नैबकॉनस से विवेक कुमार तिवारी. डॉ. गौरव दीप सिंह और ओंकार विधाते नें स्फूर्ति याजना के बारे में उपस्थित लोगों को जानकारी दी।

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