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हिमाचल सरकार ने हटाया नियम 7A, फैसला अच्छा पर कर्मचारी निराश, संगठन हुए मुखर, बोले- “निर्णय वापस लो”

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एप्पल न्यूज, शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सिविल सेवाओं (संशोधित वेतन) नियम, 2022 में बड़ा बदलाव करते हुए नियम 7A को हटा दिया है।

वित्त (वेतन पुनरीक्षण) विभाग की ओर से शनिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार यह संशोधन 3 जनवरी 2022 से प्रभावी माना जाएगा।

जारी अधिसूचना के मुताबिक, अब कर्मचारियों का वेतन ऐसे पुनर्निश्चित (refix) किया जाएगा मानो नियम 7A कभी लगू ही नहीं हुआ हो।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया के दौरान यदि किसी कर्मचारी को अधिक भुगतान (ओवरपेमेंट) हुआ है तो उसकी वसूली (रिकवरी) नहीं की जाएगी।

यह अधिसूचना हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम, 1974 के प्रावधानों के तहत जारी की गई है। वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने आदेश पर हस्ताक्षर किए।

सरकार के इस फैसले से हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है क्योंकि वेतन पुनर्निश्चितीकरण के बाद उन्हें अतिरिक्त भुगतान की वापसी नहीं करनी पड़ेगी।

अब इस फैसले के खिलाफ कर्मचारी संगठन मुखर हो गए हैं। इसे कर्मचारी विरोधी निर्णयवाते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

उन्होने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली हिमाचल प्रदेश सरकार के कर्मचारी-विरोधी फैसलों की कड़ी निंदा की।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा हाल ही में सातवें वेतन आयोग की शर्तों को वापस लेने से 89 श्रेणियों के हज़ारों कर्मचारियों को ₹10,000 से ₹20,000 का मासिक वित्तीय नुकसान हुआ है। 

उन्होंने बताया कि निवर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में इन शर्तों को लागू किया गया था, जिससे 2022 में कर्मचारियों वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी।

कर्मचारियों ने उठाई आवाज, मुख्यमंत्री से मिलने की रखी मांग


केएनएच एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज शर्मा ने मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को पत्र लिखकर कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को लेकर मुलाकात का समय मांगा है।

पत्र में मनोज शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग सन् 2012 से रोके गए नोटIONAL हायर ग्रेड की बहाली है। इसके अलावा 06 सितंबर 2025 को जारी अधिसूचना को रद्द करने की भी मांग की गई है।

एसोसिएशन का कहना है कि नोटIONAL हायर ग्रेड बंद होने से कर्मचारियों को लंबे समय से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं, हाल ही में जारी अधिसूचना ने उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

मनोज शर्मा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इन मुद्दों पर चर्चा की जाए ताकि एक संतोषजनक और न्यायपूर्ण समाधान निकल सके।

कर्मचारी संगठन का विश्वास है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से उनकी समस्याओं का समाधान संभव है।

फॉरेस्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने किया अधिसूचना को वापस लेने का आग्रह

07 सितंबर 2025 को फॉरेस्टर वेलफेयर एसोसिएशन की आपातकालीन बैठक रामपुर में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता वन वृत रामपुर के अध्यक्ष ललित भारती ने की।

जानकारी देते हुए बताया गया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लेते हुए वर्ष 2022 में लागू किए गए हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियमों में संशोधन किया है।

इस संशोधन के तहत नियम 7-ए को पूरी तरह से हटा दिया गया है, जिसका प्रभाव 3 जनवरी 2022 से लागू माना जाएगा। इस बदलाव के कारण राज्य के हजारों कर्मचारियों को हर महीने 10 हजार से 20 हजार रुपये तक का वित्तीय नुकसान हो सकता है।

एसोसिएशन मुख्यमंत्री से अधिसूचना को वापस लेने का आग्रह करती है । संगठन का कहना है कि यदि सरकार यह कदम वापस नहीं लेती है, तो इससे कर्मचारियों को गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा

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