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हिमाचल में दलित समुदाय पर बढ़ते अत्याचारों के खिलाफ माकपा का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, कार्रवाई के लिए CM को भेजे ज्ञापन

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एप्पल न्यूज़, शिमला

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने हिमाचल प्रदेश में दलित समुदाय पर बढ़ते अत्याचारों के खिलाफ प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किए। ये प्रदर्शन जिला व ब्लॉक मुख्यालयों पर किए गए। इन प्रदर्शनों में विभिन्न सामाजिक एवं दलित संगठन भी शामिल रहे। इस दौरान पार्टी ने उपायुक्तों, उप मंडल अधिकारियों व तहसीलदारों के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपे।

शिमला में उपायुक्त कार्यालय पर हुए प्रदर्शन में 20 सामाजिक एवं दलित संगठनों के नेताओं सहित सैंकड़ों लोगों ने भाग लिया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान चिड़गांव में जातीय उत्पीड़न के शिकार हुए बारह वर्षीय बालक सिकंदर के पिता व चाचा उपस्थित रहे।

शिमला उपायुक्त कार्यालय में हुए प्रदर्शन में राकेश सिंघा, संजय चौहान, कुलदीप सिंह तंवर, विजेंद्र मेहरा, जगत राम, फाल्मा, सत्यवान पुंडीर, जयशिव ठाकुर, गोपाल झिलटा, उत्तम कश्यप, मीर सुख, प्रीतपाल मट्टू, एडवोकेट पार्वती देवी, उमा लाल, विवेक कश्यप, रूहाल चंद, मस्त राम, सोनिया, रमा रावत, कर्मचंद भाटिया, सुशील बौद्ध, राजेश गाजटा, राजेश कोश, अनिल ठाकुर, सन्नी सिकटा, विवेक नेहरा, पवन कुमार, योगी सिंघानिया, मुकेश, रितेश, बालक राम, प्रताप चौहान, कपिल नेगी, नोख राम, अशोक ठाकुर, कपिल शर्मा, जगमोहन ठाकुर, आदि मौजूद रहे।

विभिन्न वक्ताओं ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों में दलित समुदाय पर बढ़ते अत्याचारों को देखना अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। किसी भी सभ्य समाज में इस तरह के अमानवीय व्यवहार की अनुमति नहीं है।

कुल्लू की सैंज घाटी, रोहड़ू के जांगला और कुल्लू में हुए दशहरा उत्सव में घटी तीन घटनाओं ने हिमाचल प्रदेश को शर्मसार किया है। भारत के संविधान में इस तरह के बर्बर व्यवहार और कार्यों के लिए कोई स्थान नहीं है तथा इस तरह के जातीय उत्पीड़न पर रोक के लिए प्रभावी कदम उठाना सरकार का संवैधानिक दायित्व है।

उन्होंने कहा कि कुल्लू की सैंज घाटी में एक दलित महिला के साथ जंगल में बलात्कार किया गया और उसके शव को टुकड़ों में काटकर एक किल्टे में ले जाया गया ताकि इस जघन्य अपराध के सभी सबूत नष्ट किए जा सकें।

चिड़गांव के जांगला में सिकंदर नाम के एक 12 वर्षीय दलित लड़के को एक ऊँची जाति की एक महिला के घर में घुसने पर गौशाला में बंद कर दिया गया और दण्ड स्वरूप बकरे की माँग की गई। इस अपमान और आघात के कारण इस बच्चे ने आत्महत्या कर ली।

कुल्लू में दशहरा उत्सव के दौरान एक अधिकारी को देव समाज के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में अपमानित किया गया और पीटा गया। हाल ही में हुए तीन मामलों ने स्तब्ध कर दिया है और समाज का एक वर्ग अपने इन कृत्यों को उचित ठहरा रहा है या स्थानीयता की आड़ में सवर्ण समाज उन प्रासंगिक तथ्यों को दबाने की कोशिश कर रहा है जो जाँच के लिए आवश्यक हैं।

उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह पीड़ितों को न्याय दे और न्याय देने के लिए सभी संवैधानिक बाध्यताओं का पालन करे तथा कानून के अनुसार अपराध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे। सरकार संविधान सम्मत दलितों पिछड़ों वंचितों के अधिकारों की रक्षा करे।

दलितों के अधिकारों को सुनिश्चित करने, दलित उत्पीड़न, प्रताड़ना, छुआछूत, भेदभाव, हत्याओं पर रोक लगाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 17, 19, 21 आदि को सख्ती से लागू किया जाए।

जातिगत उत्पीड़न का शिकार हुए सिकंदर के परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए व उसकी आत्महत्या के लिए जिम्मेवार महिला व अन्य को अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम 1989 के तहत गिरफ्तार करके कड़ी सजा दी जाए।

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