IMG_20260124_200231
previous arrow
next arrow

बड़ी खबर- सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल के बागवानों को बड़ी राहत, वन भूमि के नाम पर सेब के पेड़ नहीं कटेंगे, हाईकोर्ट का आदेश रद्द

IMG_20251207_105330
previous arrow
next arrow

एप्पल न्यूज़, नई दिल्ली/शिमला
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने हिमाचल प्रदेश के लाखों सेब बागवानों को बड़ी राहत देते हुए वन भूमि पर कथित अतिक्रमण के आधार पर सेब के पेड़ों को हटाने संबंधी हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे आदेशों के दूरगामी सामाजिक और आर्थिक परिणाम होते हैं, जो समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों और भूमिहीन लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि फलदार पेड़ों को काटने से जुड़े निर्णय नीतिगत दायरे में आते हैं और अदालतों को इस प्रकार के मामलों में अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। पीठ के अनुसार, हाईकोर्ट ने आदेश पारित करते समय इसके व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सेब बागवानी किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन होने के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लाखों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेब उत्पादन पर निर्भर हैं। ऐसे में बिना ठोस नीति और वैकल्पिक व्यवस्था के पेड़ों को काटने का आदेश समाज के कमजोर तबके को गहरे संकट में डाल सकता है।

हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि वन भूमि पर अतिक्रमण एक गंभीर कानूनी मुद्दा है और राज्य सरकार कानून के तहत कार्रवाई कर सकती है। साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह गरीब और भूमिहीन लोगों की सहायता के लिए केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्ताव पेश करे।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में तब पहुंचा जब हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2 जुलाई को दिए गए हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी। इसके अलावा पूर्व उप महापौर टिकेंद्र सिंह पंवर सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई। इससे पहले शीर्ष अदालत ने इन आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने से भूस्खलन और मिट्टी कटाव का खतरा बढ़ सकता है। उनके अनुसार 18 जुलाई तक चैथला, कुमारसैन और रोहड़ू क्षेत्रों में 3,800 से अधिक सेब के पेड़ काटे जा चुके थे, जबकि राज्यभर में करीब 50,000 पेड़ काटने की योजना थी। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ जन आक्रोश भी बढ़ा।

कोर्ट का यह फैसला किसानों की आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय के संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

Share from A4appleNews:

Next Post

हिमाचल के स्कूलों में दिसंबर में "एनुअल फंक्शन" पर रोक, खुद सरकारी नुमाइंदे और प्रिंसिपल उड़ा रहे धज्जियां

Wed Dec 17 , 2025
एप्पल न्यूज़, शिमला हिमाचल प्रदेश सरकार ने छात्रों की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए दिसंबर महीने में सरकारी स्कूलों में एनुअल (वार्षिक) फंक्शन आयोजित करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस संबंध में Directorate of School Education की ओर से औपचारिक आदेश जारी किए गए हैं, जिन्हें प्रदेश […]

You May Like

Breaking News