एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने छात्रों की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए दिसंबर महीने में सरकारी स्कूलों में एनुअल (वार्षिक) फंक्शन आयोजित करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
इस संबंध में Directorate of School Education की ओर से औपचारिक आदेश जारी किए गए हैं, जिन्हें प्रदेश के सभी उपनिदेशकों (प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा) के माध्यम से स्कूलों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सरकार द्वारा पहले ही यह नीति तय की जा चुकी है कि सरकारी स्कूलों में एनुअल फंक्शन हर वर्ष 1 नवंबर से 30 नवंबर के बीच ही आयोजित किए जाएं। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि दिसंबर महीने में छात्रों की पढ़ाई, परीक्षाओं की तैयारी और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

दिगर ये कि सरकार के ही इन आदेशों की धज्जियां सरकार मे बैठे कैबिनेट मंत्री, विधायक और प्रिंसिपल उड़ा रहे। jo लगातार इस तरह कर कार्यक्रम करवा रहे हैं।
शिक्षा विभाग के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई स्कूल इस निर्देश की अनदेखी करते हुए दिसंबर 2025 में भी एनुअल फंक्शन आयोजित कर रहे हैं, जो कि सरकार के आदेशों के विपरीत है।
दिसंबर का महीना शैक्षणिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान कई कक्षाओं में पाठ्यक्रम का बड़ा हिस्सा पूरा किया जाता है और वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू हो जाती है।

एनुअल फंक्शन की तैयारियों में छात्रों और शिक्षकों का काफी समय लग जाता है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है। इसी कारण शिक्षा विभाग ने एक बार फिर निर्देशों को दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि दिसंबर में किसी भी सूरत में वार्षिक समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा।
शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूल प्रमुखों को आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने को कहा है। निर्देशों की अवहेलना की स्थिति में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। साथ ही, सभी बीईईओ/स्कूल प्रमुखों को इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इसका उद्देश्य शैक्षणिक गतिविधियों को प्राथमिकता देना बताया गया है।
आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि कोई स्कूल प्रमुख या संस्था प्रमुख इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सभी बीईईओ और उपनिदेशकों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उनके अधीन आने वाले स्कूल आदेशों का पूरी तरह पालन करें।
कुल मिलाकर, यह निर्णय छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में सरकार का एक सख्त लेकिन आवश्यक कदम माना जा रहा है।







