एप्पल न्यूज़, सरकाघाट/मंडी
हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसों की श्रृंखला थमने का नाम नहीं ले रही है। मंडी जिले के सरकाघाट उपमंडल में शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया, जब हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बस सड़क से फिसलकर नीचे खेतों में जा गिरी।
यह दुर्घटना गोभड़ता–निली रूट पर समसौह पंचायत के हवाणी गांव के समीप सुबह करीब आठ बजे हुई। हादसे में बस में सवार करीब 15 से अधिक यात्री घायल हो गए। सभी घायलों को उपचार के लिए सरकाघाट अस्पताल पहुंचाया गया है।

जानकारी के अनुसार, बस चालक को अपेक्षाकृत अधिक चोटें आई हैं, जबकि अन्य यात्रियों को मामूली चोटें बताई जा रही हैं। राहत की बात यह रही कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एचआरटीसी बस गोभड़ता से मसेरन होते हुए सरकाघाट की ओर जा रही थी। हवाणी के पास अचानक बस अनियंत्रित हो गई और सड़क से नीचे लुढ़ककर खेतों में जा गिरी। दुर्घटना के कारणों का फिलहाल स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने घायलों को बस से बाहर निकाला और निजी वाहनों से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जिससे समय रहते उपचार संभव हो सका।
हादसे की पुष्टि करते हुए संजीव गौतम, डीएसपी सरकाघाट ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी घायलों का इलाज सरकाघाट अस्पताल में जारी है और स्थिति नियंत्रण में है।

प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं बनी चिंता का विषय
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष की शुरुआत से ही सड़क हादसों की कड़ी चिंता बढ़ा रही है। जनवरी के पहले सप्ताह में कुल्लू में 31 दिसंबर की पार्टी से लौट रहे तीन युवकों की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद सिरमौर के हरिपुरधार में हुए बस हादसे में 14 लोगों की जान चली गई।
इसी तरह मंडी जिले में कार और बस की टक्कर में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि कांगड़ा के बैजनाथ में कार के खाई में गिरने से चार युवकों ने दम तोड़ दिया। चंबा जिले में भी एक सड़क हादसे में दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके अतिरिक्त अर्की और सिरमौर में दो बड़े अग्निकांड की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने प्रदेश में सड़क सुरक्षा, सार्वजनिक परिवहन की स्थिति और यातायात प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी सड़कों पर नियमित निरीक्षण, चालक प्रशिक्षण और सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू किए जाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।







