बड़ी ख़बर- हिमाचल सरकार ने वापस लिया ‘कैबिनेट रैंक’, 20% मासिक वेतन भत्ते में कटौती, कई नेता लपेटे में

MLA RS बाली, नंद लाल भवानी पठानिया,केहर सिंह खाची
समेत एडवाइजर सुनील बिट्टू, नरेश चौहान व गोकुल बुटेल के केबिनेट रैंक हटाए गए

एप्पल न्यूज़, शिमला

Government of Himachal Pradesh ने प्रशासनिक ढांचे में सुधार और खर्चों को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए विभिन्न बोर्ड, निगमों और आयोगों में नियुक्त पदाधिकारियों को दी गई ‘कैबिनेट रैंक’ की सुविधा को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का आदेश जारी किया है।

यह आदेश राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी किया गया, जिसमें सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस निर्णय को तुरंत लागू करें और संबंधित अधिकारियों तक इसकी जानकारी पहुंचाएं।
जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से ‘कैबिनेट रैंक’ के दर्जे की समीक्षा की थी।

इस समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया कि वर्तमान में विभिन्न प्राधिकरणों जैसे बोर्ड, कॉरपोरेशन और आयोगों में कार्यरत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष (डिप्टी चेयरमैन) सहित प्रमुख सलाहकार और राजनीतिक सलाहकारों को दिया गया कैबिनेट रैंक अब समाप्त किया जाएगा।
इस फैसले का असर राज्य के कई पदाधिकारियों पर पड़ेगा, जिन्हें अब तक कैबिनेट मंत्री के समान प्रोटोकॉल, सुविधाएं और प्रतिष्ठा प्राप्त थी।

कैबिनेट रैंक मिलने से इन पदाधिकारियों को सरकारी कार्यक्रमों में विशेष प्राथमिकता, सुरक्षा, आवास और अन्य सुविधाएं मिलती थीं, जिन्हें अब वापस ले लिया जाएगा।

इससे न केवल प्रशासनिक संरचना में बदलाव आएगा, बल्कि सरकार के खर्चों में भी कमी आने की उम्मीद है।


सरकार ने केवल कैबिनेट रैंक ही वापस नहीं लिया, बल्कि वेतन से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया है। आदेश के अनुसार, संबंधित पदाधिकारियों के वेतन या मासिक भत्तों का 20 प्रतिशत हिस्सा 30 सितंबर 2026 तक के लिए स्थगित (डिफर्ड) रखा जाएगा।

यह कदम वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और राज्य के संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं और सभी विभागों को कहा गया है कि वे इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

साथ ही, इस आदेश की प्रति मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों और मुख्य सचिव के निजी सचिवों को भी भेजी गई है ताकि उच्च स्तर पर भी इसकी जानकारी सुनिश्चित हो सके।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकार की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक खर्चों पर अंकुश लगेगा। हालांकि, इस फैसले से प्रभावित पदाधिकारियों में असंतोष की स्थिति भी बन सकती है।
कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश सरकार का यह निर्णय राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में एक अहम बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

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