एप्पल न्यूज़, शिमला
Government of Himachal Pradesh ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण और सख्त निर्णय लिया है।
कार्मिक विभाग (Department of Personnel) द्वारा जारी निर्देशों के तहत अब उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी, जिन्हें सेवा विस्तार (extension) या पुनर्नियुक्ति (re-employment) दी गई है, लेकिन उनकी ईमानदारी (integrity) पर सवाल उठे हैं।
सरकार की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि हाल के समय में यह देखा गया है कि कुछ ऐसे अधिकारी, जिन्हें सेवा में विस्तार या पुनर्नियुक्ति दी गई है, वे ईमानदारी से जुड़े मुद्दों का सामना कर रहे हैं।

इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी प्रशासनिक विभागों को तत्काल ऐसे मामलों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों के अनुसार, यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की ईमानदारी संदिग्ध पाई जाती है, तो उसे दिया गया सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी।
इतना ही नहीं, भविष्य में भी ऐसे किसी अधिकारी को सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति नहीं दी जाएगी, जिसकी integrity पर संदेह हो।

सरकार ने सभी विभागों को यह भी आदेश दिया है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और उसी दिन अपनी कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) सरकार को सौंपें। इस पूरे मामले को “Most Urgent” श्रेणी में रखा गया है, जिससे इसकी गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार आएगा, बल्कि आम जनता का विश्वास भी सरकार के प्रति मजबूत होगा।
कुल मिलाकर, हिमाचल सरकार का यह निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि अब प्रशासन में ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।





