हिमाचल के 75% कर्मचारियों को 15% वृद्धि वाले तीसरी विकल्प से कोई फायदा नहीं होगा, सयुक्त कर्मचारी महासंघ ने कहा- हम पंजाब के कर्मचारियों से भी बहुत पिछड़ जाएंगे

एप्पल न्यूज़, शिमला

सयुंक्त कर्मचारी महासंघ की गूगल मीट के माध्यम से बैठक का आयोजन किया गया जिसमें 10 नए संगठनों ने शिरकत कर कुल 35 कर्मचारी संगठनों ने बैठक में भाग लिया। बैठक के दौरान सभी कर्मचारी संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष एवं महासचिव ने भाग लिया।

इस दौरान सयुक्त कर्मचारी महासंघ की कार्यकारिणी के विस्तार पर चर्चा हुई और यह तय किया गया कि सभी विभागों को महासंघ में जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि महासंघ की कार्यकारिणी जिलों से ब्लॉक तक बनाई जा सके और संयुक्त कर्मचारी महासंघ को एक वटवृक्ष की तरह मजबूत बनाया जा सके।
बैठक के दौरान सभी कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने अपनी अपनी बात रखी और पूर्ण राजत्व दिवस के उपलक्ष पर मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर उसके नफे नुकसान को लेकर सभी ने अपने विचार रखे।
बैठक का संचालन महासंघ के महासचिव हीरा लाल वर्मा ने किया और उसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने की। बैठक के दौरान विभागों के नेताओं ने अपने अपने विभाग के कर्मचारियों को हो रहे वेतन आयोग से घाटे के बारे में बताया और यह भी प्रकाश डाला गया के 15% के विकल्प से किस-किस वर्ग को फायदा या नुकसान हो रहा है।
हालांकि इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने तिन्ज भारत वेब टीवी के लाइव इंस्ट्रक्शन के माध्यम से भी हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को 15% वाले विकल्प से हो रहे फायदे – नुकसान के बारे में लोगों को अवगत कराया था।
हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान व महासचिव हीरालाल वर्मा ने एक संयुक्त बयान में पिछले कल की कार्रवाई एवं सभी कर्मचारी नेताओं के वक्तब्य को सार्वजनिक करते हुए कहा है कि जहां 3% डीए की किस्त जो जुलाई से देय बनती थी, से कर्मचारियों को फायदा होगा जिसका महासंघ स्वागत करता है।

वही 15% का विकल्प देना केवल मात्र कर्मचारियों की रिकवरी को रोकने में सहायक सिद्ध होगा इससे ज्यादा इसका कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है।
2009 से 2014 के बीच लगे केवल मात्र वही कर्मचारी इससे लाभान्वित होगे जिनका पे बैंड 27-9- 2012 की अधिसूचना से 5910 – 20200 से बढ़कर 10300- 34800 हो गया था लेकिन 2014 के बाद लगे इस पे बैंड के कर्मचारियों को भी 15% वाला विकल्प पहले से ज्यादा नुकसान दायक है।

इसके अतिरिक्त अन्य किसी भी पे बैंड से संबंधित कर्मचारियों को इस 15% वृद्धि वाले विकल्प का कोई फायदा नहीं हो रहा है।
चौहान ने कहा के जो कर्मचारी एवं शिक्षक पहले से ही 10300- 34800 वाले पे बैंड या इससे अधिक वाले पे बैंड में थे और 1-10-2012 से उनका वेतनमान या यूँ कहे ग्रेड पे संशोधित हो गया था उनको तो 15% वाले विकल्प से पहले की तुलना में 5000 तक के बेसिक पे मे और कमी आ जाएगी जिससे यह कर्मचारी पंजाब की तुलना में और पिछड़ जाएंगे।

इसका मतलब यह हुआ कि बाकी के कर्मचारी 15% वाले विकल्प को नहीं सुन पाएंगे। इसके अतिरिक्त 2009 से पहले के कर्मचारी को भी 2.59 वाला फैक्टर ही सूट करेगा यह कर्मचारी भी 15% वाला विकल्प नहीं चुन पाएंगे। तो कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि 15% वाला विकल्प किसी भी तरह से कर्मचारियों को फायदेमंद नहीं होगा।

जब तक 1-10-2012 से देय संशोधित वेतनमान में 2 साल की शर्त खत्म नहीं की जाती है और साथ में इनिशियल स्टार्ट की बहाली नहीं होती है तब तक ना तो हिमाचल का कर्मचारी एवं शिक्षक पंजाब के बराबर आ सकता है और ना ही किसी तरह का लाभ उक्त कर्मचारियों को मिल सकता है इसलिए हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ सरकार के इस फैसले से बिल्कुल भी खुश नहीं है।

क्योंकि महासंघ ने सरकार से एक तो पंजाब की तर्ज पर संशोधित वेतनमान और इनिशियल स्टार्ट बहाल करने की मांग की थी और उसमें 2 साल का प्रोबेशन खत्म करने की मांग की थी और उस एवज में 15% वाला विकल्प देने की बात कही थी तभी कर्मचारियों को इसका लाभ हो सकता है लेकिन सरकार ने ना तो 2 साल का प्रोबेशन पीरियड खत्म किया और ना ही कर्मचारियों को इनिशियल स्टार्ट 1-10-2011 की तिथि में प्रदान किया है ।
इसके अतिरिक्त पुराने व नए कर्मचारियों के लिए टाइम स्केल को लेकर महासंघ ने जो मांग की थी उसके ऊपर भी सरकार ने कोई घोषणा नहीं की है क्योंकि जिन कर्मचारियों को 4-9-14 टाइम स्केल का लाभ मिलना है उसकी गणना व लाभ नए वेतनमान निर्धारण में आनी आवश्यक है और जब टाइम स्केल का लाभ कर्मचारियों को मिलेगा तो स्वता ही उसका लेबल बदल जायेगा जोकि हो नहीं रहा है ।
महासंघ के सभी नेताओं ने एक स्वर से उन कर्मचारी नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि अब वे नेता मीडिया में आकर कर्मचारियों को बताएं के जो दावे 2 दिन बाद होने के वे मीडिया के माध्यम से कर रहे थे और लोगों को 2 दिन का इंतजार करने की अपील की जा रही थी अब उनका क्या हुआ ।
कल की वर्चुअल बैठक के माध्यम से संयुक्त कर्मचारी महासंघ के सभी नेताओं ने एक स्वर से कहां कि हमने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है यदि हमारे अल्टीमेटम के अनुसार सभी बातों को नहीं माना जाता है तो संयुक्त कर्मचारी महासंघ हजारों कर्मचारियों की मौजूदगी में सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेगा और अपने डिमांड चार्टर में दी गई सभी मांगों को पूरा करवाने का काम करेगा।

हालांकि पेंशनरों को लेकर की गई उनकी मांग पर सरकार ने वेतन आयोग लागू करने की घोषणा कर दी है जो स्वागत योग्य कदम है लेकिन वेतन आयोग की अन्य अनियमितताओं एवं पंजाब की तर्ज पर सम्मानजनक भत्ते देने की अन्य मांगों पर महासंघ लगातार सरकार के खिलाफ मोर्चा खुलता रहेगा और साथ ही हिमाचल प्रदेश के सभी कर्मचारियों से अपील करता है कि आप हिमाचल प्रदेश सयुंक्त कर्मचारी महासंघ में अपना विश्वास बनाए रखें न की उक्त कर्मचारी नेताओं पर विश्वास करें जो सरकार का गुणगान ज्यादा और कर्मचारी हित में कम बात करते हैं और कर्मचारियों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं ।

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