एप्पल न्यूज, शिमला
हिमाचल प्रदेश में इस समय मौसम का मिजाज बदल गया है और लगातार बारिश का दौर चल रहा है।
मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि राज्य में आगामी 5 जून तक वर्षा की संभावना बनी रहेगी, जबकि 6 जून से मौसम साफ और शुष्क हो जाएगा।
इसके अलावा, इस वर्ष मॉनसून सामान्य से करीब 10 दिन पहले हिमाचल में दस्तक देने वाला है, और इसके 20 जून के आसपास प्रदेश में प्रवेश की संभावना जताई जा रही है।

🔶 बारिश और ओलावृष्टि से बदला मौसम
राजधानी शिमला में बीती रात लगभग 1 बजे जमकर ओलावृष्टि हुई जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और मौसम ठंडा हो गया।
सोमवार शाम को भी शहर में भारी ओले गिरे। हालांकि, यह ओलावृष्टि केवल शहर तक सीमित रही, जबकि ऊपरी शिमला के इलाकों में उस समय धूप खिली रही।
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 14 स्थानों पर बारिश दर्ज की गई, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
ददाहू: 27.4 मिमी
जतौन बैराज: 21.6 मिमी
पांवटा साहिब: 18.8 मिमी
भरमौर: 18.0 मिमी
कसौली व राजगढ़: 14.0 मिमी
सोलन व धर्मपुर: 8.6 मिमी
इसके अलावा नाहन, पालमपुर, अघार, बंजार और कसोल समेत अन्य क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
हालांकि राज्य में बीते 24 घंटों में कहीं भी बर्फबारी दर्ज नहीं की गई है, लेकिन मौसम विभाग ने बताया है कि एक दिन पहले रोहतांग टॉप पर हल्की बर्फबारी हुई थी।
वहीं, चंबा जिले की पांगी घाटी से बर्फबारी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
तेज तूफान ने बढ़ाई चिंता
प्रदेश के कांगड़ा, सुंदरनगर, भुंतर, मुरारी देवी व पालमपुर क्षेत्रों से तेज तूफान की सूचनाएं मिली हैं, जिससे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा है।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने को कहा है।
आगे का मौसम पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार:
3 व 4 जून: कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।
5 जून: कुछेक क्षेत्रों में हल्की वर्षा की संभावना।
6 जून से: प्रदेश भर में मौसम शुष्क और साफ रहने की संभावना है।
मौसम विभाग ने आगामी कुछ दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। कुछ स्थानों पर भारी वर्षा और तूफान की चेतावनी दी गई है।
ऐसे में यात्रियों और स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे सावधानी बरतें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
यदि मॉनसून इस बार 10 दिन पहले आता है तो यह कृषि, जल स्रोतों और पर्यटन उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। साथ ही यह जल संरक्षण और फसलों की बुवाई के लिहाज़ से भी अनुकूल माना जा रहा है।







