हिमाचल में बनेंगे “नए जिले”, प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग मंजूर, रामपुर बुशहर, नूरपुर, देहरा और पालमपुर बन सकते हैं जिले

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एप्पल न्यूज़, शिमला
शिमला। हिमाचल प्रदेश में आने वाले समय में प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए एक आयोग गठित करने को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।

आयोग प्रदेश के उपमंडलों, विकास खंडों, तहसीलों और उप-तहसीलों की सीमाओं तथा उनकी संख्या की व्यापक समीक्षा करेगा। इससे भविष्य में नए जिलों के गठन की संभावनाएं भी मजबूत हो गई हैं।
प्रदेश में लंबे समय से नूरपुर, देहरा, पालमपुर और रामपुर को जिला बनाने की मांग विभिन्न स्तरों पर उठती रही है। वहीं बद्दी, नूरपुर और देहरा में अतिरिक्त पुलिस जिले पहले से कार्यरत हैं। ऐसे में प्रशासनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया नए जिलों के गठन की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।


सरकार का मानना है कि बीते वर्षों में कई प्रशासनिक इकाइयों का गठन स्थानीय आवश्यकताओं और राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया था। हालांकि इसके चलते सरकारी खर्च में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

कई क्षेत्रों में कम कार्यभार और सीमित संसाधनों के बावजूद अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों का संचालन किया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ा है।
सरकार अब प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में काम करना चाहती है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 12 जिले, 81 उपमंडल, 92 विकास खंड तथा 193 तहसीलें और उप-तहसीलें संचालित हो रही हैं। आयोग इन सभी इकाइयों का विस्तृत अध्ययन करेगा।
आयोग भौगोलिक परिस्थितियों, जनसंख्या, प्रशासनिक जरूरत, क्षेत्रों की दूरी, उपलब्ध संसाधनों और वित्तीय बोझ जैसे विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। इसके आधार पर प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव, इकाइयों के पुनर्गठन, विलय अथवा संख्या में कटौती से जुड़े सुझाव सरकार को सौंपे जाएंगे।
हिमाचल प्रदेश में विशेष रूप से कांगड़ा क्षेत्र में पिछले दो दशकों से नए जिलों के गठन की चर्चा समय-समय पर होती रही है, लेकिन कांग्रेस और भाजपा की पूर्व सरकारों ने इस दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया।

नए जिलों के गठन का मुद्दा राजनीतिक और क्षेत्रीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि इससे स्थानीय भावनाएं भी जुड़ी होती हैं।
हालांकि सरकार ने आयोग के गठन को प्रशासनिक सुविधा और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता से जोड़कर देखा है। आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए अभी कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है।

सरकार जल्द अधिसूचना जारी कर आयोग के कार्य, उद्देश्य और समयसीमा को स्पष्ट करेगी। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है।
यदि आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं, तो आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश का प्रशासनिक नक्शा बदलता हुआ नजर आ सकता है।

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