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वेंटिलेटर घोटाला- जेम पोर्टल पर रेट था 9.9 लाख, इमरजेंसी में खरीदे, फिर भी 10 दिन में होगी जांच

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एप्पल न्यूज़, शिमला

स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि वेंटिलेटर खरीद के दौरान कथित अनियमितताओं के बारे में निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं से सम्पूर्ण दस्तावेजों सहित रिपोर्ट तलब की गई है।
निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं ने स्पष्ट किया कि इन वेंटिलेटरों की खरीद उस समय की गई है जब पूरा देश और प्रदेश कोरोना के संकट से जूझ रहा था और पूरे देश में स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार और विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य विभागों का ध्यान स्वास्थ्य सेवाओं की सक्षमताओं को बढ़ाने पर केन्द्रित था, क्योंकि वेंटिलेटर की मदद से कोविड-19 से गंभीर रूप से ग्रसित मरीजों को बचाया जा सकता है।

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स्वास्थ्य विभाग सभी स्वास्थ्य संस्थानों को सशक्त करने के लिये वेंटिलेटर्ज को क्रय करना चाहता था। इसी कड़ी में 28 मार्च, 2020 को उप निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया, जिसमें क्रय किये जाने वाले वेंटिलेटर्ज को तकनीकी मानकों के अनुसार निर्धारित किया और अपनी संस्तुतियों के आधार पर आईसीयू वेंटिलेटर खरीदने की सिफारिश की।
निदेशालय स्वास्थ्य सेवाएं के स्तर पर संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में गठित की गई क्रय समिति ने संस्तुत वेंटिलेटर को क्रय करने की प्रकिया आरम्भ की और भारत सरकार के जेम पोर्टल (ळमड च्वतजंसद्ध पर उपलब्ध वेंटिलेटर के मूल्य व मानकों का अध्ययन किया। समिति ने यह पाया कि संस्तुत वेंटिलेटर का मूल्य जेम पोर्टल में 29 मार्च, 2020 को 9.9 लाख रुपये दर्शाया गया है।

इसी बीच समिति ने अन्य राज्यों में वेंटिलेटर के क्रय के लिए अपनाई जा रही प्रकिया के बारे में भी अध्ययन किया और पाया कि उड़ीसा मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन जो कि उड़ीसा सरकार का उपक्रम है, ने यह संस्तुत वेंटिलेटर 20 मार्च, 2020 को क्रय किये थे। उड़ीसा मेडिकल सप्लाईज कार्पोरेशन ने 20 वेंटिलेटर कुल 1.83 करोड़ रुपये के क्रय किये थे, जिसमें जीएसटी शामिल नहीं था।

विभागीय क्रय समिति ने समय को ध्यान में रखते हुये और स्वास्थ्य संस्थानों को कोविड-19 के उपचार हेतु सशक्त बनाने के उद्देश्य से सभी पहलुओं जैसे मूल्य, तकनीक, मानक इत्यादि को ध्यान में रखते हुए 10 वेंटिलेटर क्रय करने के आदेश जारी किए, जिनमें से 7 वेंटिलेटर 15 अप्रैल, 2020 को विभाग को प्राप्त हुए, जिन्हें तुरन्त प्रभाव से स्वास्थ्य संस्थानों को भेज दिया गया।
स्वास्थ्य निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि तत्पश्चात् हरियाणा मेडिकल सप्लाईज कार्पोरेशन ने उक्त वंेटिलेर का क्रय 16 अप्रैल, 2020 को किया है और प्रति वेंटिलेटर के क्रय पर खर्च की गई राशि 10.29 लाख रुपये है, जो हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय द्वारा पूरे वेंटिलेटर की खरीद पर की गई राशि के समान है।
निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि आज भी उक्त वेंटिलेटर का मूल्य जेम पोर्टल पर 10.30 लाख रुपये है, जो वेंटिलेटर विभाग को दिए गए, उनसें मूल उपकरण, मेडिकल एयर प्रोसेसर, बेसिक एसेसरीज, एडल्ट/पीडियाट्रिक/नियो नेटल इप्लिकेशन एसेसरीज, आॅप्शनल एसेसरीज, ईटीसीओ2 एप्लिकेशन एसेसरीज, एसपीओ2 एप्लिकेशन एसेसरीज, हयुमिडिफायर, पांच साल की वारंटी सम्मिलित थीं।
प्रारम्भिक तौर पर स्वास्थ्य निदेशालय में वेंटिलेटर को क्रय करने की प्रकिया में कोई अनियमितताएं नहीं पाई गई हैं, फिर भी पारदर्शिता के लिए यह निर्णय लिया गया है कि इस मामले में निदेशक उद्योग व नियन्त्रक स्टोर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए, जिसमें निदेशक, चिकित्सा शिक्षा, प्रधानाचार्य आईजीएमसी एवं उप नियन्त्रक, वित्त एवं लेखा चिकित्सा शिक्षा निदेशालय अन्य सदस्य होंगे। यह समिति 10 दिन के भीतर रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करेगी।

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