एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश पुलिस के पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय ने पुलिस अधिकारियों के मीडिया से संवाद को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। दिसंबर 2025 में जारी इस सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि अब केवल अधिकृत वरिष्ठ अधिकारी ही अपराध, कानून-व्यवस्था, जांच और पुलिस नीतियों से जुड़े मामलों पर मीडिया से औपचारिक रूप से बातचीत कर सकेंगे।
सर्कुलर के अनुसार, कई मामलों में यह देखा गया है कि उपमंडलीय पुलिस अधिकारी (SDPO) और थाना प्रभारी (SHO) मीडिया से बातचीत करते हुए सार्वजनिक बयान दे रहे हैं।

इसे अनुशासनहीनता मानते हुए DGP कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) और रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) के अलावा कोई भी अधिकारी मीडिया से आधिकारिक बयान नहीं देगा। आवश्यकता पड़ने पर इन अधिकारियों को भी पुलिस मुख्यालय (PHQ) की पूर्व अनुमति लेनी होगी।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि SDPO, SHO सहित अन्य सभी अधिकारी न तो प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया को बयान देंगे और न ही किसी आधिकारिक मामले पर इंटरव्यू, ब्रीफिंग या प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति न हो।

यह सर्कुलर CCS (कंडक्ट) नियम 1964, हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम 2007 और पंजाब पुलिस नियम 1934 (हिमाचल में लागू) के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।
इनमें सरकारी कर्मचारियों को बिना अनुमति मीडिया को सूचना देने से रोकने और पुलिस अधिकारियों के लिए अनुशासन व वैध आदेशों का पालन अनिवार्य बताया गया है।
DGP कार्यालय ने सभी पर्यवेक्षी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इस सर्कुलर के बाद अब प्रदेश में पुलिस की ओर से मीडिया को दी जाने वाली जानकारी अधिक नियंत्रित और आधिकारिक स्तर पर ही सामने आएगी।







