एप्पल न्यूज़, शिमला
केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश को आपदा राहत के रूप में जारी की गई 601 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा नेताओं पर तीखा कटाक्ष करते हुए केंद्र सरकार की नीयत और नीति दोनों पर सवाल उठाए हैं।
रिज मैदान, शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा राहत को “तड़पा-तड़पा कर” देना न तो संवेदनशीलता दिखाता है और न ही संघीय ढांचे की भावना के अनुरूप है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वर्ष 2023 की भीषण बरसात और प्राकृतिक आपदाओं से हिमाचल प्रदेश को भारी नुकसान हुआ था। इस नुकसान का आकलन खुद केंद्र सरकार ने लगभग 9300 करोड़ रुपये किया था।

इसके बावजूद प्रदेश को अब तक केवल 1500 करोड़ रुपये की आपदा राहत स्वीकृत की गई। उन्होंने कहा कि यह कुल आकलित नुकसान का महज 15 प्रतिशत है, जो कि अत्यंत निराशाजनक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) के तहत कुल 2006 करोड़ रुपये की राशि तय की गई, जिसमें से 500 करोड़ रुपये राज्य सरकार को स्वयं वहन करने हैं। यानी राज्य पहले से ही अपने सीमित संसाधनों से बड़ी जिम्मेदारी निभा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहली किस्त के रूप में 451 करोड़ रुपये मिले, अब दूसरी किस्त में 601 करोड़ रुपये जारी हुए हैं, जबकि राज्य सरकार अब तक 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च कर चुकी है।
ऐसे में राहत राशि को किश्तों में जारी करना प्रदेश के लिए गंभीर कठिनाइयां पैदा कर रहा है।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वह उनकी हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं समझते।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को बयानबाजी करने के बजाय दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से हिमाचल के हक का पैसा दिलाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि “ये लोग दिल्ली जाकर हिमाचल का पैसा रुकवाने की बात करते हैं, जबकि उन्हें राज्य के हित में आवाज उठानी चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित कई योजनाओं की राशि अब तक हिमाचल को नहीं मिली है। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए भी धनराशि अब तक जारी नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह केवल प्रदेश सरकार के साथ नहीं, बल्कि हिमाचल की जनता के साथ अन्याय है, जो आपदा के बाद पुनर्निर्माण और विकास की उम्मीद लगाए बैठी है।
अंत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर हिमाचल प्रदेश को उसका वाजिब हक दिया जाए।
उन्होंने कहा कि आपदा राहत कोई एहसान नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है और इसे समय पर, पूरी राशि के साथ जारी किया जाना चाहिए, ताकि आपदा से प्रभावित लोगों को वास्तविक राहत मिल सके।







