एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई में सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए चलाई जा रही मुहिम के तहत यह तथ्य उजागर हुआ कि 38,672 बुजुर्गों को उनके निधन के बाद भी पेंशन दी जा रही थी।
तकनीक से हुआ बड़ा खुलासा
राज्य सरकार के वेलफेयर विभाग द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अंतर्गत प्रदेश में 8 लाख से अधिक लाभार्थियों को पेंशन दी जाती है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर आईटी विभाग को पेंशन लाभार्थियों के डिजिटाइजेशन और वेरिफिकेशन का जिम्मा सौंपा गया। इसके लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया गया, जिसके माध्यम से लाभार्थियों का सर्वे कराया गया।

इस सर्वे में कुल 7,12,680 लाभार्थियों का सत्यापन किया गया। परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे—
6,74,173 लाभार्थी जीवित पाए गए
जबकि 38,672 लाभार्थियों का निधन हो चुका था, इसके बावजूद उनके नाम पर पेंशन जारी थी
अपात्र लाभार्थी भी पकड़े गए
सिर्फ यही नहीं, सर्वे में 5,538 ऐसे लाभार्थी भी सामने आए, जो सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए पात्र ही नहीं थे, फिर भी उन्हें इसका लाभ मिल रहा था।
इसके अलावा 566 ऐसे मामले भी पाए गए, जिनमें लाभार्थियों के जीवित होने से संबंधित दस्तावेज तो मौजूद थे, लेकिन सर्वे के दौरान वे व्यक्ति मौके पर नहीं मिले।
जनजातीय क्षेत्रों में ऑफलाइन सर्वे
जनजातीय और दूरदराज़ क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण ऑफलाइन सर्वे करना पड़ा। यहां भी लाभार्थियों की वास्तविक संख्या और पेंशन वितरण में अंतर पाया गया, जिससे साफ है कि तकनीकी कमी के कारण लंबे समय से गड़बड़ियां चल रही थीं।
NIC के डाटा से हुआ मिलान
वेलफेयर विभाग का पूरा डाटा नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा मैनेज किया जाता है। NIC से प्राप्त आंकड़ों को राज्य के आईटी विभाग द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के जरिए वेरिफाई किया गया, जिसके बाद यह अनियमितताएं उजागर हो सकीं।
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश
इन आंकड़ों को मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने वेलफेयर विभाग को निर्देश दिए कि नए सत्यापित डाटा के आधार पर ही आगे पेंशन का वितरण किया जाए और जहां भी लापरवाही हुई है, उसकी जांच सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट कहा है कि टेक्नोलॉजी के प्रभावी इस्तेमाल से ही सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाई जा सकती है।
उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि इसी तरह के डिजिटल रिफॉर्म्स हर विभाग में लागू किए जाएं, ताकि जनता के पैसे का सही और ईमानदार उपयोग सुनिश्चित हो सके।
यह कार्रवाई न केवल सरकारी धन की बचत की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, बल्कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही को रोकने के लिए एक मॉडल उदाहरण भी बन सकती है।







