कल रात पतिदेव जी अचानक अपनी बेटी के कमरे में गए। रात के लगभग 12 बज रहे थे। ऑफिस से लौटने में देर हो गई थी। घर में सब सो चुके थे। जैसे ही वह अपनी बेटी के कमरे के पास से गुज़रे, उनकी नज़र मेज़ पर रखी एक कॉपी पर पड़ी। यूँ ही उन्होंने कॉपी खोल ली। वह उनकी 12 साल की बेटी की डायरी थी। पहले तो उन्होंने उसे बंद करने की सोची, लेकिन एक लाइन पर उनकी नज़र ठहर गई।
उसमें लिखा था, “मेरे पापा दुनिया के सबसे मेहनती इंसान हैं, लेकिन काश उनके पास मेरे लिए थोड़ा और समय होता।”
यह पढ़ते ही उनके हाथ काँप गए।
उन्होंने आगे पढ़ा।
“आज स्कूल में मुझे पुरस्कार मिला। सब बच्चों के मम्मी-पापा आए थे। मम्मी तो आई थीं, लेकिन पापा नहीं आ पाए। मुझे पता है कि वह हमारे लिए मेहनत करते हैं, इसलिए मैं उनसे नाराज़ नहीं हूँ। लेकिन जब मैं स्टेज पर थी, तब मैंने भीड़ में उन्हें बहुत ढूँढा था।”
पतिदेव जी की आँखें भर आईं।
उन्हें याद आया कि उस दिन उन्होंने बेटी से वादा किया था कि वह ज़रूर आएँगे, लेकिन एक मीटिंग की वजह से नहीं जा सके।
उन्होंने सोचा था कि बेटी छोटी है, भूल जाएगी।
लेकिन बच्चे वादे नहीं भूलते।
वे सिर्फ़ चुप हो जाते हैं।
उन्होंने डायरी का आख़िरी पन्ना खोला।
वहाँ लिखा था,
“मैं बड़ी होकर बहुत पैसे कमाना नहीं चाहती। मैं बस इतनी बड़ी बनना चाहती हूँ कि मेरे बच्चे कभी यह महसूस न करें कि उनके पास सब कुछ था, बस उनका माँ या पापा नहीं था।”
अब उनके आँसू रुक नहीं रहे थे।
वह धीरे से बेटी के बिस्तर के पास जाकर बैठ गए।
बेटी गहरी नींद में सो रही थी।
उन्होंने उसके सिर पर हाथ फेरा और पहली बार महसूस किया कि वह परिवार के लिए पैसा तो कमा रहे थे, लेकिन शायद वही चीज़ खो रहे थे जो सबसे कीमती थी—अपने बच्चों का बचपन।
उस रात उन्हें नींद नहीं आई।
सुबह होने तक वह बस यही सोचते रहे कि प्रमोशन फिर मिल सकता है, पैसा फिर कमाया जा सकता है, लेकिन बेटी की यह उम्र, उसकी ये मासूम बातें और उसके साथ बिताने वाले पल कभी वापस नहीं आएँगे।
अगले दिन उन्होंने ऑफिस से छुट्टी ली।
जब बेटी स्कूल से लौटी, तो उसने अपने पापा को घर पर देखकर हैरानी से पूछा,
“पापा, आज ऑफिस नहीं गए?”
पतिदेव जी मुस्कुराए।
उन्होंने बेटी को गले लगाकर कहा,
“आज मेरी सबसे ज़रूरी मीटिंग तुम्हारे साथ है।”
बेटी की आँखें चमक उठीं।
और उस पल पतिदेव जी को एहसास हुआ कि जिंदगी की सबसे बड़ी सफलता वह नहीं होती जो दुनिया देखती है।
सबसे बड़ी सफलता वह होती है, जब आपके अपने लोग आपके साथ होने पर मुस्कुराते हैं।
सीख:
परिवार के लिए मेहनत करना ज़रूरी है, लेकिन परिवार के साथ समय बिताना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है। क्योंकि बच्चों को आपकी दौलत नहीं, आपकी मौजूदगी याद रहती है।







