एप्पल न्यूज, शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण स्तर पर पशुपालन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पशु मित्र नीति-2025 अधिसूचित कर दी है।
इस नई नीति के तहत राज्य में शुरुआती चरण में 500 पशु मित्र पद भरे जाएंगे। चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिदिन चार घंटे कार्य करना होगा और उन्हें 5000 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा।
कौन बनेगा पशु मित्र
पशु मित्र बनने के लिए उम्मीदवारों को शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी है। चयन प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को 25 किलो वजन उठाकर 100 मीटर की दौड़ एक मिनट में पूरी करनी होगी। सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति से पहले 10 दिन का प्रशिक्षण नजदीकी पशु चिकित्सालय में दिया जाएगा।

नीति के अनुसार उम्मीदवार हिमाचल प्रदेश का वास्तविक निवासी होना चाहिए और उसी ग्राम पंचायत या शहरी निकाय क्षेत्र से संबंध होना आवश्यक है।
न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 10वीं पास तय की गई है, जबकि आयु सीमा 18 से 45 वर्ष निर्धारित की गई है। पशुपालन गतिविधियों का अनुभव रखने वालों को चयन में वरीयता मिलेगी।
नियुक्त पशु मित्र ग्रामीण स्तर पर पशुपालकों की मदद करेंगे। उन्हें पशुओं की देखभाल, इलाज, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, चारा प्रबंधन, बीमार व नवजात पशुओं की देखरेख और मृत पशुओं का निस्तारण जैसे कार्य सौंपे जाएंगे। इसके अलावा पशुशालाओं व फार्मों की सफाई और प्रयोगशालाओं में सहयोग भी करना होगा। चयनित पशु मित्रों को वार्षिक 12 दिन की छुट्टी और महिला कर्मियों को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा।
चयन प्रक्रिया
पशु मित्रों का चयन उपमंडल स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा। चयन प्रक्रिया मेरिट और शारीरिक परीक्षा के आधार पर होगी।
मेरिट सूची में शैक्षणिक योग्यता, पशुपालन का अनुभव, बीपीएल, विधवा, अनाथ, एनसीसी/खेल उपलब्धियों को अंक दिए जाएंगे। चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग के बाद नियुक्ति की जाएगी।
किस जिले को कितने पद
पशु मित्रों के 500 पदों में सबसे ज्यादा शिमला में 78, मंडी में 67 और कांगड़ा जिले (धर्मशाला 72, पालमपुर 16) में 88 पद भरे जाएंगे। इसके अलावा सिरमौर व सोलन में 37-37, ऊना में 36, चंबा में 29, हमीरपुर में 28, बिलासपुर में 17, कुल्लू में 14, किन्नौर में 13, भरमौर में 6, ज्यूरी में 5, पांगी में 5, लाहुल-स्पीति में 3 और काजा में 2 पद निर्धारित किए गए हैं।
पशुपालन विभाग के सचिव रीतेश चौहान ने बताया कि पशु मित्र नीति से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
पशुपालन गतिविधियों को सशक्त बनाने से आवारा पशु समस्या और मानव-पशु संघर्ष जैसे मुद्दों से निपटने में मदद मिलेगी।






