एप्पल न्यूज़, शिमला
बच्चों में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं, मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने एक अहम और दूरगामी फैसला लिया है। इस नई पहल के तहत अब हिमाचल प्रदेश के सभी स्कूलों के परिसर और उससे 50 मीटर के दायरे में जंक फूड और ट्रांसफैट युक्त खाद्य पदार्थों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
यह निर्णय बच्चों की सेहत को सुरक्षित रखने और उन्हें स्वस्थ खानपान की ओर प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरकार के इस निर्णय को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए मंडी जिले से शुरुआत की गई है। मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

आदेशों के अनुसार, स्कूल कैंटीन, स्कूल परिसर में चलने वाली दुकानें और स्कूलों के आसपास मौजूद अस्थायी या स्थायी खाद्य विक्रेताओं को ट्रांसफैट और जंक फूड बेचने की अनुमति नहीं होगी।
यदि कोई दुकानदार या संस्था इस आदेश का उल्लंघन करती पाई गई, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि जंक फूड की श्रेणी में आने वाले खाद्य पदार्थ—जैसे चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स, बर्गर, पिज़्ज़ा, अत्यधिक तले-भुने और कृत्रिम तत्वों से युक्त खाद्य सामग्री—अब स्कूलों के आसपास उपलब्ध नहीं होंगी।
इन खाद्य पदार्थों में मौजूद ट्रांसफैट बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह प्रतिबंध लगाया है।
सरकार ने स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी तय की है। सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यालय के मुख्य द्वार पर स्पष्ट सूचना पट्ट लगाएं, जिसमें यह उल्लेख हो कि स्कूल परिसर और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री प्रतिबंधित है।
इसके साथ ही स्कूलों के भीतर छात्रों को स्वस्थ खानपान के प्रति जागरूक करने के लिए नियमित गतिविधियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहयोग से एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य केवल दुकानदारों पर नियंत्रण रखना ही नहीं, बल्कि अभिभावकों और बच्चों को भी यह समझाना है कि स्वस्थ भोजन ही बेहतर भविष्य की नींव है।
स्कूल परिसर से बाहर 50 मीटर के दायरे में प्रतिबंध लागू कराने और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग के सहायक आयुक्त को सौंपी गई है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी हिमाचल प्रदेश के 500 से अधिक स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े जागरूकता अभियान चला रहा है।
इस तरह हिमाचल प्रदेश देश का 17वां राज्य बन गया है, जिसने स्कूलों के आसपास जंक फूड पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
कुल मिलाकर, यह पहल केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि बच्चों के स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ाया गया एक सशक्त कदम है। यदि इसे सख़्ती और निरंतरता के साथ लागू किया गया, तो आने वाले समय में इसके सकारात्मक और दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे।







