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बहुचर्चित गुड़िया मामले में 28 अप्रैल को आएगा फैसला

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दसवीं की छात्रा को दुष्कर्म के बाद बर्बर तरीके से उतारा गया था मौत के घाट
एप्पल न्यूज़, शिमला

कोटखाई के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म एवं हत्या मामले में फैसला टल गया है। शिमला की स्थानीय अदालत अब इस मामले में 28 अप्रैल 2021 को फैसला सुनाएगी। प्रदेश को झकझोर कर रखने वाली इस घटना में गुड़िया को दुष्कर्म के बाद बर्बर तरीके से मौत के घाट उतारा गया था। सीबीआई ने मामले में पेशे से लकड़ी का काम करने वाले (चिरानी) नीलू नामक शख्स को गिरफ्तार किया था।
चार वर्ष पुराने इस मामले की सुनवाई इन दिनों शिमला के सेशन कोर्ट में चल रही है। शुक्रवार को सेशन जज राजीव भारद्वाज की कोर्ट में आरोपी नीलू को पेश किया गया। इस दौरान सीबीआई की सैम्पलिंग को लेकर दोनों पक्षों के वकीलों के बीच बहस हुई। 
बचाव पक्ष के वकील एम. एस. ठाकुर ने कहा कि सीबीआई द्वारा लिए गए सैंपल संदेह के घेरे में हैं। सीबीआई ने नीलू के सैंपल हिरासत में लेने से पहले ही ले लिए थे और इसकी सील भी सीबीआई ने अपने पास ही रखी है। बचाव पक्ष के वकील ने यह भी कहा कि इस मामले में किसी अन्य को बचाने के लिए सीबीआई द्वारा नीलू को फसाया जा रहा है। 
दूसरी तरफ सीबीआई के वकील ने दलील दी कि नीलू के डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट बिल्कुल सही है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जज ने मामले की सुनवाई 28 अप्रैल को तय की है। माना जा रहा है कि इस तारीख को कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है। 
उल्लेखनीय है कि यह मामला तब सुर्खियों में आया था जब कोटखाई क्षेत्र में चार जुलाई 2017 को स्कूल से घर लौटने के बाद गुड़िया अचानक लापता हो गई थी और छह जुलाई की सुबह उसका शव बरामद हुआ था। इस घटना से पूरे प्रदेश में हडक़म्प मच गया था। पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन कोटखाई पुलिस लॉकअप में एक आरोपी सूरज की कस्टोडियल मौत हो गई थी। इसके बाद लोगों के दवाब के बीच यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। इसके लिए राज्य सरकार खुद हाईकोर्ट गई थी और वहां अर्जी लगाकर मामले को सीबीआई को सौंपने का आग्रह किया था। इसके बाद सीबीआई ने सूरज की हत्या के आरोप में प्रदेश पुलिस के आईजी जहूर जैदी समेत आठ पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार किया था।

सीबीआई ने गुड़िया मामले में 13 अप्रैल 2018 को आरोपी नीलू को गिरफ्तार किया था। सीबीआई का दावा है कि चिरानी का काम करने वाले नीलू ने गुड़िया से दरिंदगी की थी। आरोपी नीलू के खिलाफ सीबीआई ने जुलाई 2018 में कोर्ट में चालान पेश हुआ था।  सीबीआई ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर नीलू को दुष्कर्म व हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। अहम बात ये है कि गुड़िया के परिजन सहित कुछ स्वयमसेवी संस्थाएं सीबीआई की जांच पर सवाल उठा चुके हैं। सीबीआई जांच से नाखुश गुड़िया परिवार ने बीते दिनों हिमाचल हाईकोर्ट में पुर्नविचार याचिका दाखिल की है। गुड़िया के परिजनों ने हाईकोर्ट के किसी सीटिंग जज से मामले की जांच करवाने की मांग की है।

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