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“नशे से दूर रहो-मत करो खुदकुशी” हिमाचल में 13 महीनों में पकड़े 2880, 125 महिलाएं भी गिरफ्तार, एक रिपोर्ट…

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एप्पल न्यूज, शिमला

हिमाचल प्रदेश में नशे की तस्करी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन पुलिस ने इस पर लगाम लगाने के लिए सख्त अभियान छेड़ रखा है।

पिछले 13 महीनों (जनवरी 2024 से जनवरी 2025 तक) में एनडीपीएस (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances) एक्ट के तहत 1943 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 125 महिलाओं समेत 2880 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस की जांच से पता चला है कि हिमाचल में चिट्टा (हेरोइन) और चूरा पोस्त बाहरी राज्यों से आ रहे हैं, जबकि हिमाचल में उगाई जाने वाली चरस अन्य राज्यों में तस्करी की जा रही है।

यह साफ दर्शाता है कि हिमाचल प्रदेश अब सिर्फ नशे के उपभोक्ताओं का नहीं, बल्कि तस्करी के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट भी बनता जा रहा है।

ऐसे में इसे रोकना बेहद जरूरी है अन्यथा खुद युवा नशे के दलदल में फंसकर खुदकुशी कर रहे हैं।

2024 में जब्त किए गए मादक पदार्थ:

  • चरस: 371.003 किलोग्राम
  • अफीम: 36.256 किलोग्राम
  • हेरोइन (चिट्टा): 11.026 किलोग्राम
  • पोस्ता भूसा: 684.58 किलोग्राम
  • गांजा: 33.71 किलोग्राम
  • कोकेन: 5.210 ग्राम
  • प्रतिबंधित दवाएं: 35,682 गोलियां, 48 बोतल सिरप और 18,991 कैप्सूल

2025 (जनवरी तक) में जब्ती:

  • चरस: 36.597 किलोग्राम
  • अफीम: 1.610 किलोग्राम
  • हेरोइन: 1.671 किलोग्राम
  • पोस्ता भूसा: 5.181 किलोग्राम
  • गांजा: 2.026 किलोग्राम
  • प्रतिबंधित दवाएं: 20 गोलियां, 1 बोतल सिरप और 592 कैप्सूल

गिरफ्तार किए गए लोग:

  • 2024: 2515 आरोपी (112 महिलाएं, 2 विदेशी)
  • 2025 (जनवरी तक): 365 आरोपी (13 महिलाएं)

पुलिस की सख्त निगरानी और रणनीति

हिमाचल पुलिस अब नशा तस्करों पर लगातार नजर रख रही है। डीजीपी स्टेट सीआईडी संजीव रंजन ओझा के अनुसार, सभी पुलिस थानों में एनडीपीएस के मामलों में संलिप्त अपराधियों के रिकॉर्ड के लिए एक विशेष रजिस्टर तैयार किया गया है।

इसके अलावा, जो अपराधी जेल से सजा काटकर बाहर आते हैं, उन पर भी सख्त निगरानी रखी जा रही है।

क्या दिखाते हैं ये आंकड़े?

  1. महिलाओं की संलिप्तता:
    • 125 महिलाओं की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि अब महिलाएं भी इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
    • नशे की तस्करी में महिलाओं को उपयोग करने का एक कारण यह हो सकता है कि वे कम संदेह के घेरे में आती हैं।
  2. ड्रग्स की आपूर्ति और खपत:
    • हिमाचल में चिट्टा बाहरी राज्यों से लाया जा रहा है, जो यहां के युवाओं को बड़ी संख्या में लत में धकेल रहा है।
    • चरस की तस्करी हिमाचल से अन्य राज्यों में हो रही है, जिससे यह साफ होता है कि यहां अवैध खेती और उत्पादन भी हो रहा है।
  3. नशा विरोधी अभियानों का प्रभाव:
    • बढ़ती गिरफ्तारी से यह स्पष्ट है कि पुलिस का अभियान प्रभावी हो रहा है।
    • हालांकि, जब्त की गई ड्रग्स की भारी मात्रा यह भी दर्शाती है कि समस्या अभी गंभीर बनी हुई है।

समाधान और आगे की रणनीति

  • स्कूल और कॉलेजों में जागरूकता अभियान: युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित करना बेहद जरूरी है।
  • सीमाओं पर सख्त निगरानी: हिमाचल में नशा बाहरी राज्यों से आ रहा है, इसलिए सीमाओं पर कड़ी निगरानी आवश्यक है।
  • आजीविका के नए साधन: जो लोग नशे की तस्करी में संलिप्त हैं, उनके लिए वैकल्पिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
  • कम्युनिटी पुलिसिंग: समाज और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल से नशे के खिलाफ मजबूत रणनीति बनाई जा सकती है।

हिमाचल प्रदेश में नशे की समस्या गंभीर बनी हुई है, लेकिन पुलिस लगातार सक्रियता दिखा रही है। 1943 मामलों में 2880 गिरफ्तारियां और भारी मात्रा में ड्रग्स की जब्ती इस बात का प्रमाण है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां मुस्तैदी से काम कर रही हैं।

हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि जब तक समाज, सरकार और परिवार मिलकर इस समस्या से नहीं लड़ेंगे, तब तक नशे की जड़ें पूरी तरह नहीं खत्म हो पाएंगी।

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