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हिमाचल में मई की बर्फबारी से लौटी दिसंबर सी ठंड, फिर गर्म कपड़ों में लिपटे लोग, ऊँची चोटियों पर हिमपात तो नीचे ओलावृष्टि हानिकारक

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एप्पल न्यूज, शिमला

प्रदेश में रविवार को मौसम ने करवट ली और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बर्फबारी दर्ज की गई। लाहुल-स्पीति जिले और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली की ऊँची चोटियों ने एक बार फिर बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है।

शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि को रोहतांग, बारालाचा, मढ़ी, धुंधी, मकरवेद व शिकरवेद जैसे क्षेत्रों में ताजा हिमपात हुआ।

मई महीने में हुई इस असामान्य बर्फबारी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मनाली और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को गर्म कपड़े निकालने पड़े।

पर्यटकों के बीच जहां यह दृश्य आकर्षण का केंद्र बना, वहीं मनाली-लेह मार्ग की बहाली के प्रयासों को इससे बाधा भी पहुंची है। लाहुल घाटी में भी सर्द हवाओं ने सर्दियों जैसी ठंड का एहसास कराया।

मई 2025 के पहले सप्ताह में हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में हुई तेज ओलावृष्टि ने राज्य के बागवानी और कृषि क्षेत्र को भारी क्षति पहुंचाई है।

खासकर ऊपरी शिमला, मंडी, कुल्लू, किन्नौर, सिरमौर और चंबा जिलों में सेब, आड़ू, प्लम और खुबानी जैसे गुठलीदार फलों के साथ-साथ गेहूं, मटर, टमाटर और आलू जैसी फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है।

बागवानों के अनुसार ओलावृष्टि के चलते सेब के फूल और नवांकुर झड़ गए हैं, जिससे उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आने की आशंका है।

गुठलीदार फलों की बाहरी त्वचा पर चोट लगने के कारण उनकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों प्रभावित होंगे। खेतों में खड़ी सब्जियों और अनाज की फसलें या तो नष्ट हो गई हैं या उनमें सड़न शुरू हो चुकी है।

इससे किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है और खासकर वे किसान जो फसल बीमा योजना से नहीं जुड़े हैं, उनके लिए स्थिति और भी संकटपूर्ण है।

प्रभावित इलाकों में राज्य सरकार और कृषि विभाग की टीमें नुकसान का सर्वेक्षण कर रही हैं तथा राहत राशि की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है।

वहीं, बागवानों ने सरकार से तुरंत मुआवजा, बीमा योजना में सरलता, फलों के लिए समर्थन मूल्य और ओलावृष्टि से बचाव हेतु जाल लगाने के लिए अनुदान बढ़ाने की मांग की है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने आने वाले दिनों में फिर से मौसम बिगड़ने की चेतावनी दी है, जिससे शेष बचे फलों को भी खतरा है।

ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि राज्य सरकार त्वरित राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक नीति तैयार करे जिससे भविष्य में इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।

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