एप्पल न्यूज, शिमला
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर शिकंजा कसते हुए वर्ष 2025 के पहले छह महीनों में रिकॉर्ड 7,09,026 वाहनों के चालान किए हैं। पुलिस की इस सख्ती से साफ संकेत मिलता है कि राज्य सरकार अब सड़क अनुशासन को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।
सख्ती के आंकड़े बताते हैं कहानी
पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी टीटीआर) विनोद कुमार ने जानकारी दी कि जनवरी से जून 2025 के बीच कुल 7,09,026 चालान किए गए, जिनमें से 1,94,076 चालानों का निपटारा कर ₹19.93 करोड़ (19 करोड़ 93 लाख 151 रुपये) का जुर्माना वसूला गया।
यह पिछले वर्ष 2024 की इसी अवधि के मुकाबले कहीं अधिक है, जब केवल 4,12,050 चालान किए गए थे।

प्रमुख उल्लंघनों के आंकड़े:
बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना: 1,52,524 मामले
बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाना: 9,796 मामले
ड्रंक एंड ड्राइव (नशे में वाहन चलाना): 7,693 मामले
मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना: 6,497 मामले
शेष सब करीब 5 लाख आइडियल पार्किंग के चालान हैं
विश्व बैंक प्रायोजित सड़क सुरक्षा परियोजना और राज्य परिवहन विभाग की योजना के तहत, पुलिस ने ट्रैफिक निगरानी के लिए अत्याधुनिक डिजिटल उपकरणों का उपयोग शुरू किया है।
राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर 66 से अधिक एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली (ITMS) सक्रिय हैं। एल्को सेंसर, स्पीड गन और सीसीटीवी कैमरों जैसे उपकरणों के जरिये निगरानी और सख्ती में काफी बढ़ोतरी हुई है।
जन जागरूकता और सख्त कार्रवाई—दोनों पर ज़ोर
एआईजी विनोद कुमार के अनुसार, “हमारा लक्ष्य सिर्फ चालान करना नहीं है, बल्कि सड़क पर सुरक्षा और नियमों के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी को भी बढ़ावा देना है। तकनीक और प्रशासन के बेहतर समन्वय से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना ही हमारी प्राथमिकता है।”
हिमाचल में बढ़ती ट्रैफिक सख्ती न केवल कानून व्यवस्था को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि नागरिकों को जिम्मेदार वाहन चालक बनने की दिशा में भी प्रेरित कर रही है। यदि यह रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में सड़क हादसों में निश्चित ही गिरावट देखने को मिलेगी।







