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हिमाचल के स्कूलों में “बैग फ्री डे” पर “मारी आपणी बोली” को बढ़ावा, अब बच्चे शिक्षक “पहाड़ी बोली” में बतियाएंगे

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एप्पल न्यूज, शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में छात्रों की स्थानीय संस्कृति और भाषा से जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए एक अभिनव पहल शुरू की है। इस नई पहल के तहत अब “बैग फ्री डे” पर विद्यार्थियों को अपनी स्थानीय पहाड़ी बोली सिखाई जाएगी।

शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि हर महीने के एक शनिवार को बैग फ्री डे मनाया जाएगा, जिस दिन छात्र बिना किताब-कॉपी के स्कूल आएंगे और इस विशेष दिन का उपयोग रचनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय बोली सिखाने में किया जाएगा।

इस दिन बच्चे अपनी स्थानीय बोली में अध्यापकों से संवाद करेंगे, साथ ही लोकगीत, कहावतें, किस्से-कहानियां और पारंपरिक खेलों जैसी सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा।

इसका उद्देश्य बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ना, भाषाई विविधता को प्रोत्साहन देना और नई पीढ़ी को लोकसंस्कृति से परिचित कराना है।

हिमाचल प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में मंडी की मंडयाली, कांगड़ा की पहाड़ी, सिरमौर की पांगी, कुल्लूवी, किन्नौरी, भटियाली जैसी अनेक बोलियाँ बोली जाती हैं, जो अब स्कूलों के माध्यम से संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री ने इस फैसले को “भाषाई समृद्धि और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम” बताया है और उम्मीद जताई कि इससे बच्चों में अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व की भावना जागृत होगी।

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