एप्पल न्यूज, शिमला
हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने वर्दी में सोशल मीडिया के उपयोग पर कठोर नियंत्रण लागू करते हुए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है।
इसका उद्देश्य पुलिस वर्दी की गरिमा बनाए रखना, विभाग की छवि व जनविश्वास को मजबूत करना और संवेदनशील या आधिकारिक सूचनाओं के अनधिकृत प्रसार पर रोक लगाना है।
यह SOP हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम, पुलिस रूल्स, केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम 1964 व अन्य लागू प्रावधानों के तहत लागू की गई है।

अब वर्दी पहनकर क्या-क्या नहीं कर सकेंगे पुलिस कर्मी
नई SOP के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी वर्दी में निम्न कार्य नहीं करेगा—
सेल्फी या निजी फोटो लेना व उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करना
धार्मिक, राजनीतिक या व्यक्तिगत प्रकृति की सामग्री शेयर करना
किसी भी घटना, अपराध, गिरफ्तारी, आरोपियों की पहचान या ड्यूटी स्थल का फोटो/वीडियो साझा करना
सरकारी दस्तावेज, आदेश, वायरलेस संदेश या विभागीय सूचना का प्रसार
निजी सोशल मीडिया अकाउंट से सरकारी नीतियों, पुलिसिंग या कार्यालय आदेशों पर टिप्पणी करना
किन गतिविधियों को मिलेगी अनुमति
SOP में स्पष्ट किया गया है कि—
केवल वही अधिकारी/कर्मचारी विभागीय सोशल मीडिया हैंडल संचालित कर सकेंगे जिन्हें सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति प्राप्त है।
अधिकृत पोस्ट केवल प्रेस नोट, जन-जागरूकता सामग्री और कानून-व्यवस्था से संबंधित आधिकारिक सूचनाओं तक सीमित होंगी।
नियमों का आधार और दंड
नई SOP को केंद्रीय सिविल सेवा नियम, आईटी अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम के तहत लागू किया गया है।
उल्लंघन को गंभीर कदाचार माना जाएगा, और दोषी कर्मियों के खिलाफ—
विभागीय जांच
निलंबन
वेतन वृद्धि रोकना
सेवामुक्ति
जैसी कार्रवाइयाँ की जा सकती हैं। आवश्यकता पड़ने पर आपराधिक मुकदमा भी चलाया जाएगा।
निरंतर निगरानी
प्रत्येक थाना प्रभारी और इकाई प्रमुख को समय-समय पर सोशल मीडिया गतिविधियों की समीक्षा करने तथा उल्लंघन की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
SOP तुरंत प्रभाव से लागू
पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह SOP तुरंत प्रभाव से लागू मानी जाएगी।







