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खाद-बीज-उपकरण के बजाय DBT से दिया जाएगा MIS में खरीदे सेब का पैसा, छोटे किसानों को मिलेगी प्राथमिकता- नेगी

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एप्पल न्यूज़, शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) में बड़ा बदलाव करते हुए सेब खरीद का भुगतान अब सीधे किसानों के बैंक खातों में करने का फैसला लिया है।

बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्पष्ट किया कि एमआईएस के तहत खरीदे गए सेब का पैसा अब डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से दिया जाएगा।

इस नई व्यवस्था में छोटे और सीमांत किसानों को पहले भुगतान किया जाएगा, जबकि उसके बाद अन्य किसानों-बागवानों को राशि जारी होगी।
मंत्री ने बताया कि अब एमआईएस में नकद या वस्तुओं के रूप में किसी प्रकार का भुगतान या अनुदान नहीं दिया जाएगा। सरकार को बजट के माध्यम से जो भी राशि उपलब्ध होगी, वह पूरी तरह से डीबीटी के जरिए ही किसानों तक पहुंचेगी।

उन्होंने स्वीकार किया कि एमआईएस की मौजूदा प्रणाली अपेक्षित रूप से कारगर नहीं रही, इसलिए भुगतान को पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है।
बजट को लेकर मंत्री ने कहा कि एमआईएस केंद्र सरकार की योजना है, लेकिन केंद्र की ओर से इस योजना के लिए लंबे समय से कोई ठोस बजट प्रावधान नहीं किया गया। पूर्व में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी देनदारियां बनी थीं।

वर्तमान में एमआईएस के अंतर्गत 115 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां लंबित हैं। सरकार का प्रयास है कि उपलब्ध संसाधनों के भीतर रहते हुए भुगतान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाए और किसानों को समय पर लाभ मिले।
इस बीच, सेब पर आयात शुल्क घटाने के प्रस्ताव ने प्रदेश के बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका से आयात होने वाले सेब पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत किए जाने की बात सामने आने के बाद बागवानों का कहना है कि इससे विदेशी सेब सस्ते दामों पर बाजार में आएंगे, जिससे हिमाचल के सेब उत्पादकों को नुकसान हो सकता है।

हिमाचल प्रदेश फल, फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आयात शुल्क में कटौती से स्थानीय सेब के दाम प्रभावित होंगे और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।
बागवानी मंत्री नेगी ने इस विषय पर कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल आए थे, तब उनसे बाहरी देशों से आयात होने वाले सेब पर शुल्क बढ़ाने की मांग रखी गई थी।

उन्होंने बताया कि पहले आयात शुल्क 75 से बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया गया था, लेकिन बाद में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समझौतों के चलते इसमें बदलाव किए गए।

मंत्री ने माना कि आयात शुल्क घटने से बागवानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है और इस मुद्दे को उचित मंचों पर उठाया जाएगा।
कुल मिलाकर, एमआईएस में डीबीटी आधारित भुगतान व्यवस्था लागू होने से किसानों को पारदर्शी और सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, वहीं सेब पर आयात शुल्क में कटौती का मसला प्रदेश के बागवानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

सरकार और किसान संगठनों के बीच इस विषय पर आगे भी चर्चा और समाधान की आवश्यकता बताई जा रही है।

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