एप्पल न्यूज़, शिमला
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में आयोजित व्यापार बोर्ड की बैठक में हिमाचल प्रदेश ने व्यापार, निर्यात संवर्धन और औद्योगिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठाए। बैठक में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) आर. डी. नज़ीम ने किया।
उद्योग मंत्री ने भारत औद्योगिक विकास योजना के तहत पर्वतीय राज्यों के लिए औद्योगिक सुविधाओं की स्थापना हेतु न्यूनतम पात्रता सीमा 25 एकड़ किए जाने पर केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने बताया कि राज्य के चार प्रस्तावित औद्योगिक क्लस्टरों के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन अंतिम चरण में हैं, जिन्हें जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इनमें सोलन के वाकनाघाट (मझोल), नालागढ़ के घीर-लखनपुर, सिरमौर के काला आंब (ओगली) और ऊना के बीटन-टाहलीवाल औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।
बैठक में बताया गया कि हिमाचल का निर्यात वर्ष 2003-04 के लगभग 500 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 20,414 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसे राज्य की निर्यातोन्मुख औद्योगिक नीतियों का सकारात्मक परिणाम बताया गया।

उद्योग मंत्री ने बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) का उपकार्यालय तथा ऊना के प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क में राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER), मोहाली का उप-परिसर स्थापित करने की मांग भी रखी।
उन्होंने पर्वतीय राज्यों में अधिक परिवहन लागत को निर्यात की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए चंडीगढ़-बद्दी रेल परियोजना को शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया, जिससे उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत कम होगी और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि हिमाचल प्रदेश के 17 उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हो चुका है, जिनमें हाल ही में सात नए उत्पाद शामिल किए गए हैं। साथ ही मुख्यमंत्री की “एक जिला–तीन उत्पाद” पहल के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जीआई टैग प्राप्त उत्पादों और जिला आधारित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और निर्यात संवर्धन कार्यक्रमों के माध्यम से हिमाचल के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में पूरा सहयोग देगी।
उद्योग मंत्री ने सक्रिय औषधीय संघटक (API), बल्क ड्रग्स, डेटा सेंटर, आयुष, वन आधारित उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, रक्षा विनिर्माण और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों को राज्य की निर्यात प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए हरित एवं सतत औद्योगिक विकास पर भी जोर दिया।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि उत्तरी, पर्वतीय और स्थल-रुद्ध राज्यों के साथ अलग-अलग बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि उनकी निर्यात संबंधी चुनौतियों के अनुरूप विशेष नीतिगत उपाय किए जा सकें। साथ ही जिला स्तर पर जिला निर्यात संवर्धन समितियों के गठन की भी जानकारी दी गई, जो स्थानीय उत्पादों की पहचान और निर्यात क्षमता बढ़ाने का कार्य करेंगी।







