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उप मुख्यमंत्री की अगुआई में पेयजल स्कीमों को बहाल करने में जुटा विभाग, शिमला ज़ोन की 80 % पेयजल स्कीमें बहाल

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एप्पल न्यूज़, शिमला

प्रदेश में अभूतपूर्व बारिश और बाढ़ के कारण पेयजल स्कीमों को हुए भारी नुकसान से निपटने के लिए जल शक्ति विभाग के कर्मचारी जहां विषम परिस्थितियों में दिन-रात स्कीमों को बहाल करने में जुटे हुए हैं वहीं अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंच कर क्षतिग्रस्त स्कीमों की बहाली को सुनिश्चित करने में लगे हैं और कर्मचारियों का हौसला बढ़ा रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री जी के मार्गदर्शन और अगुआई में विभाग मुस्तैदी के साथ स्कीमों को रिकार्ड समय में बहाल करने में जुटा है। उपमुख्यमंत्री के निर्देशानुसार पेयजल स्कीमों की मुरम्मत और मशीनरी के लिए धन की आपूर्ति में कोई कमी नहीं रखी जा रही है।

जल शक्ति विभाग हिमाचल प्रदेश के शिमला ज़ोन के अर्न्तगत आने वाले शिमला, सोलन, सिरमौर, किन्नौर व स्पिति जिला में कुल 5304 स्कीमों में से 2276 स्कीमें क्षतिग्रस्त हो गई थीं जिनमें से विभाग ने 1919 स्कीमों को बहाल कर दिया है।

विभाग की मुख्य अभियंता अंजु शर्मा ने जानकारी दी कि विभाग ने शिमला ज़ोन के सभी शहरी और कस्बों की स्कीमों को बहाल कर दिया है इसमें सोलन, नालागढ़, अर्की, बद्दी, नाहन, राजगढ़, रोहड़ू, रामपुर, जुब्बल, हाटकोटी शामिल है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी जहां जल स्रोत जलमग्न हुए हैं या बह गए हैं वहां पेयजल आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

मुख्य अभियंता ने बताया कि भारी भूस्खलन के कारण शिमला की घरोग-घण्डल पेयजल स्कीम के भण्डारण टैंक में गाद और पानी भर जाने के कारण बहुत नुकसान हुआ है। 42 गांवों को पेयजल आपूर्ति करने वाली इस स्कीम को बहाल करने में थोड़ा समय लग सकता है लेकिन विभाग के कर्मचारी स्कीम को बहाल करने में दिन-रात जुटे हुए हैं।

अंजु शर्मा ने बताया कि सोलन के धर्मपुर की दो स्कीमें भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई हैं। वहां भी वैकल्पिक व्यवस्था करके लोगों को पेयजल उपलब्ध करवाया जा रहा है।

बार-बार बारिश होने के कारण कई स्कीमें बार-बार क्षतिग्रस्त हुई हैं जिसकी वजह से पेयजल स्कीमों की बहाली में अड़चने अवश्य आ रही हैं लेकिन विभाग अपनी पूरी कोशिश करके स्कीमों की बहाली के लिए काम कर रहा है।

नाहन मण्डल की राजगढ़, रोहड़ू मण्डल की सरस्वती नगर और कोटखाई स्कीमों को पुनः बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मैदानी क्षेत्र में जहां पेयजल स्कीमों के भूमिगत स्रोत पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं वहां जल स्तर उतरने के बाद बहाली का काम किया जा रहा है।

वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर हैंडपम्पों और प्राकृतिक स्रोत से पानी की सप्लाई की जा रही है और विभाग पेयजल स्कीमों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करने में लगा हुआ है लेकिन सिंचाई और सिवरेज योजनाओं की मुरम्मत के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि जनता इस विकट परिस्थिति में विभाग का सहयोग करे और स्थिति के सामान्य होने तक पेयजल के इस्तेमाल में संयम और किफायत बरतें। पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी पंचायत को वितरित की गई फील्ड टैस्ट किट के माध्यम से पानी की नियमित जांच करते रहें।

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