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भूमि से बेदखली के मुद्दे पर किसानों का ज़बरदस्त प्रदर्शन, हजारों किसानों ने घेरा शिमला सचिवालय

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एप्पल न्यूज, शिमला

सुप्रीम कोर्ट से सेब के पौधों को काटने पर लगी रोक के बाद किसानों और बागवानों ने मंगलवार को सचिवालय का घेराव किया।
हिमाचल किसान सभा और हिमाचल सेब उत्पादक संघ के बैनर तले हजारों किसानों ने बेदखली और घरों की तालाबंदी के खिलाफ टालैंड‌ से छोटा शिमला सचिवालय तक रैली निकाल कर सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदेश के सभी जिलों से आए प्रभावित किसानों ने बेदखली के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया।

किसानों और बागवानों ने बेदखली और घरों की तारबंदी का विरोध करते हुए सरकार से पुरजोर मांग की कि गरीब किसानों को 5 बीघा जमीन दी जाए।

किसानों का कहना था कि अगर सरकार युवाओं को रोजगार नहीं दे पा रही तो। कम से कम खेतीबाड़ी कर जीवनयापन कर रहे किसानों को उजाड़ा तो न जाए।

संयुक्त किसान संघ के संयोजक संजय चौहान ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज बहुत से परिवार ऐसे है जिनको बेघर कर दिया गया है और वे भरी बरसात में तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि गरीबों, दलितों और विधवाओं के सेब के पौधे काट कर सरकार क्या साबित करना चाह रही है और किसका भला कर रही है।

उन्होंने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि जहां पर तालाबंदी और सेब कटान किया जा रहा है वहां संगठित होकर लड़ाई लड़नी होगी।

हिमाचल किसान सभा के राज्य सचिव राकेश सिंघा ने अपनी बात रखते हुए सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया और कहा कि हिमाचल में जो किसानों की बेदखली की जा रही है उसमें कानून को दर किनार करके बेदखली के गलत तरीके अपनाए जा रहे हैं।

उन्होंने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि सरकार हाईकोर्ट में किसानों का पक्ष ठीक तरह से नहीं रख पाई। उन्होंने कहा कि बहुत से ऐसे परिवार हैं जिनको नौतोड़ में ज़मीन दी गई और कई चकौताधारक हैं जिनको 1980 से पहले ज़मीन आबंटित की गई थी लेकिन किसी कारणवश वह उनके नाम नहीं हुई उन लोगों को भी उजाड़ा जा रहा है।

किसानों के प्रदर्शन के बीच मुख्यमंत्री ने किसान सभा और सेब उत्पादक संघ को बातचीत के लिए बुलाया।

मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री से बैठक में किसानों का पक्ष रखते हुए किसान सभा के राज्य सचिव राकेश सिंघा सहित संजय चौहान, डॉ. कुलदीप सिंह तंवर और किसानों ने सरकार को अपना मांगपत्र सौंपा और किसानों की बेदखली को तुरंत रोकने की मांग रखी।

राकेश सिंघा बात रखते हुए कहा कि गलत तरीके से बेदखली करने वाले अफसरों को तुरंत रोका जाए और सरकार सबसे पहले किसानों की बेदखली रोकने के लिए हाईकोर्ट में एफिडेविट दे कि जब तक सरकार इंक्रोचमेट के ऊपर कोई पॉलिसी न लाए तब तक बेदखली पर रोक लगाई जाए।

मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री ने आश्वासन दिया कि
सरकार कोर्ट में किसानों का पक्ष रखेगी।

सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार किसानों की वकालत कर राहत दिलाने का प्रयास करेगी ।

राजस्व मंत्री ने कहा कि आज ही कैबिनेट में वन सचिव को पेड़ कटान व घरों की तालाबंदी रोकने के लिए आदेश देगी और वन अधिकार कानून को सख्ती से लागू करने के आदेश देगी।

राजस्व मंत्री ने कहा कि अगर कोई भी अफसर इन दावों पर अड़चन डालता पाया गया तो उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। इस बारे में किसान सभा व सेब उत्पादक संघ सीधे उनसे फोन करके शिकायत कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही बेदखली व जमीन से जुड़े मुद्दों पर एक कमेटी बना कर किसानों के हितों को देखते हुए एक किसान हितैषी पॉलिसी बनाई जाएगी और किसान सभा व सेब उत्पादक संघ के सुझाव भी लिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा की 68 प्रतिशत जमीन वन भूमि होने के मुद्दे को पर्यावरण मंत्रालय केंद्रीय मंत्री से उठाया जाएगा कि 22 प्रतिशत जमीन में वन होने के इलावा जो बाकी जमीन है उसमें राज्य सरकार को भी लोगों को देने का अधिकार दिया जाए। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत तौर पर दिल्ली जाकर संबंधित मंत्री से यह मुद्दा उठाएंगे।

बैठक के बाद रैली में निर्णय लिया गया कि सरकार को 15 दिन का समय देकर देखा जाएगा अगर सरकार किसानों के हित में कोई निर्णय नहीं लेती तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

आगामी 13 अगस्त को किसान बागवान संगठन खंड स्तर पर बेदखली और भूमि से संबंधित अन्य मुद्दों पर प्रदर्शन करेंगे।

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