एप्पल न्यूज, शिमला
भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और शिमला के एसपी संजीव कुमार गांधी के बीच का विवाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र में गहराता जा रहा है।
यह विवाद हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) के महाप्रबंधक विमल नेगी की रहस्यमयी मृत्यु की सीबीआई जांच से संबंधित है।
विवाद की शुरुआत
विमल नेगी की मौत के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) की जांच पर सवाल उठाते हुए इसे सीबीआई को सौंप दिया।
इस फैसले के बाद, एसपी संजीव गांधी ने भाजपा विधायक सुधीर शर्मा पर आरोप लगाया कि उन्होंने कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो क्लिप बिना अनुमति के प्रसारित किया, जिससे उनकी छवि धूमिल हुई।
गांधी ने इसे कॉपीराइट और सूचना अधिनियम का उल्लंघन बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
विधायक सुधीर शर्मा का पलटवार
विधायक सुधीर शर्मा ने एसपी गांधी के आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है। शर्मा का कहना है कि वीडियो क्लिप कोर्ट की अनुमति से लाइव स्ट्रीम की गई थी और इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं की गई।
उन्होंने एसपी पर झूठे आरोप लगाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
एसपी गांधी के गंभीर आरोप
एसपी संजीव गांधी ने न केवल विधायक पर बल्कि राज्य के डीजीपी अतुल वर्मा और मुख्य सचिव प्रभोध सक्सेना पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
गांधी का दावा है कि डीजीपी के निजी स्टाफ का ड्रग माफिया से संबंध है और उन्होंने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य सचिव ने रामकृष्ण मिशन से जुड़े एक मामले में जांच न करने का दबाव डाला।
यह विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर मानहानि के आरोप लगा रहे हैं। विमल नेगी की मौत की जांच अब सीबीआई के अधीन है, और इस मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद की जा रही है।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस विवाद में क्या निर्णय लेती है और इससे हिमाचल प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ता है।









