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ACS की जांच रिपोर्ट पढ़ते तो CM को पता चलते सारे तथ्य, सिस्टम सुक्खू के काबू के बाहर, हर कोई कर रहा है मनमानी- जयराम

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अगर मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ होते तो कार्रवाई करते

एप्पल न्यूज, मंडी

मंडी से बयान में नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री अपर मुख्य सचिव द्वारा की गई प्रशासनिक जांच रिपोर्ट को स्वयं पढ़ते तो उन्हें बहुत सारे तथ्यों का पता चल जाता।

हमने जो भी बातें कही हैं, सरकार पर जो भी आरोप लगाए हैं। वह सरकार के अधिकारियों द्वारा ही कहे गए हैं और न्यायालय में भी द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं। जिन दस्तावेजों के आधार पर हमने अपनी बातें कही है वह सभी रिकॉर्ड में दर्ज है।

सबसे हैरानी की बात है यह सब कुछ कहने वाले मुख्यमंत्री के द्वारा ही नियुक्त किए गए लोग हैं । अगर उन्हें अभी भी संशय है तो वह माननीय न्यायालय में उन्हीं के अधिकारियों द्वारा दाखिल किए गए कागजातों को एक बार अगर देख लेंगे तो उन्हें स्वयं उत्तर मिल जाएगा।

जयराम ठाकुर ने कहा कि तथ्यों को नकारने, सच्चाई से नज़रे चुराने और झूठ का सहारा लेकर मुख्यमंत्री खुद को बचा नहीं सकते। विपक्ष पर सवाल उठाने की बजाय उन्हें खुद के भीतर झांकने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री के बयान और उनके काम के बीच जमीन आसमान का फर्क है। वह बातें बहुत बड़ी-बड़ी करते हैं, भ्रष्टाचार रोकने के दावे करते हैं और जिन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है उन्हें संरक्षण देते हैं। ऐसे लोगों का खुले आम समर्थन करते हैं। उनकी बातें बचकानी और हास्यास्पद लगती हैं।

एक परिवार को जो न्याय नैसर्गिक रूप से उन्हें मिलना चाहिए था, उसके लिए उन्हें सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ना पड़ा। जिस अधिकारी ने अपने जीवन भर प्रदेश की सेवा की उसी अधिकारी की मृत्यु के मामले की जांच सरकार निष्पक्ष करवाने को तैयार नहीं।

प्रदेश के पुलिस का आलाधिकारी जिस जांच में जांचकर्ता की निष्ठा पर सवाल उठा रहा हो उस मामले को मुख्यमंत्री इतनी आसानी से कैसे ले सकते हैं।

एक व्यक्ति की जान चली गई और जांच कर रहे लोग सबूत जुटाने के बजाय मिटाने में लगे हैं और सब कुछ पब्लिक डोमेन में आने के बाद भी मुख्यमंत्री तमाशाई बनकर सब कुछ देखते रहे। जिम्मेदार पदों पर बैठकर किसी भी गलत काम को मौन सहमति देना भी न्याय नहीं है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं कर सकते? तो वह बताएं पिछले हफ्ते जो कुछ भी हुआ क्या हुआ अनुशासनहीनता नहीं थी?अनुशासनहीनता का इससे बड़ा कौन सा नमूना वह देखना चाहते हैं।

सरकार के इस रवैए से लोगों का सरकार से भरोसा उठ रहा है। भरोसे का कायम रहना बहुत जरूरीहै। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं यदि मुख्यमंत्री को अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं है तो वह बीते घटनाक्रम पर सख्त से सख्त कार्रवाई करें।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सब कुछ सरकार के नियंत्रण के बाहर है। ब्यूरोक्रेसी पर सरकार का कोई नियंत्रण रहा नहीं, पुलिस अधिकारियों के हाल प्रदेश से छुपे नहीं है। विधायक और मंत्री सरकार के खिलाफ क्या बोल और कह रहे हैं वह पूरे प्रदेश ने देखा है।

कांग्रेस के नेताओं और संगठन के साथ सरकार का जो तालमेल है वह भी देखने लायक है। सबकुछ सरकार और मुख्यमंत्री के नियंत्रण के बाहर है। प्रदेश में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। इसलिए मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

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