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हिमाचल में “नशा तस्करी” के 22 मामलों में 17.63 करोड़ की “संपत्ति फ्रीज”

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एप्पल न्यूज, शिमला

हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की है, जिसमें तस्करों की अवैध संपत्तियों को फ्रीज कर उनके आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

पुलिस द्वारा वर्ष 2025 में अब तक नशा तस्करी से संबंधित 22 अलग-अलग मामलों में लगभग 17.63 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की जा चुकी है।

यह कार्रवाई न केवल नशा कारोबार से जुड़े मुख्य आरोपियों पर नकेल कसने के लिए है, बल्कि उनके वित्तीय स्रोतों को भी खत्म करने का प्रयास है ताकि वे दोबारा इस अवैध धंधे में सक्रिय न हो सकें।

इन मामलों में प्रदेश के उत्तरी क्षेत्र के सात और दक्षिणी क्षेत्र के 13 तस्करों की संपत्तियां फ्रीज की गई हैं, जबकि दो अन्य आरोपियों की संपत्ति की जांच अभी भी जारी है।

इनमें से चार नशा तस्करों की संपत्ति चार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की पाई गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नशे के इस कारोबार में बड़े स्तर पर आर्थिक लेन-देन हो रहा था।

जिला स्तर पर यदि बात की जाए तो पुलिस ने कांगड़ा में 2.33 करोड़ रुपये, नूरपुर पुलिस जिला में 6.97 करोड़ रुपये, सोलन जिला में 4.61 करोड़ रुपये, सिरमौर में 3.47 करोड़ रुपये और पुलिस जिला बद्दी में लगभग 22.96 लाख रुपये से अधिक की संपत्तियां फ्रीज की हैं।

इन संपत्तियों में अचल संपत्ति, बैंक खातों, वाहन और अन्य निवेश शामिल हैं, जो नशा तस्करी से अर्जित धन से खरीदे गए थे।

पुलिस की यह कार्रवाई एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के प्रावधानों के तहत की जा रही है। इस कानून के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की संपत्ति का स्रोत संदिग्ध पाया जाता है और उसका संबंध नशीले पदार्थों के व्यापार से साबित होता है, तो ऐसी संपत्ति को जब्त या फ्रीज किया जा सकता है।

तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो वर्ष 2024 में 12 अलग-अलग मामलों में 25.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी, जबकि वर्ष 2025 में अब तक 22 मामलों में 17.63 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की जा चुकी है।

इससे स्पष्ट होता है कि इस वर्ष पुलिस ने मामलों की संख्या में वृद्धि की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि नशा तस्करों के खिलाफ अभियान और अधिक व्यापक तथा लक्षित हो गया है।

राज्य सरकार और पुलिस विभाग की यह संयुक्त मुहिम नशा माफिया की आर्थिक जड़ें काटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ठोस कदम मानी जा रही है। इसका उद्देश्य केवल अपराधियों को सजा दिलाना ही नहीं, बल्कि उनके वित्तीय ढांचे को ध्वस्त करना भी है ताकि समाज में नशे के प्रसार को जड़ से समाप्त किया जा सके।

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