सुक्खू बोले, 110 करोड़ के घोटाले की जांच विजिलेंस कर रही, भ्रष्टाचारी जेल भेजे जाएंगे
– नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर झूठे आंकड़े पेश करने का लगाया आरोप, उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच की मांग की
एप्पल न्यूज, शिमला
विधानसभा में शुक्रवार को एक बार फिर हिमकेयर योजना को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। पूर्व भाजपा सरकार के समय शुरू हुई इस योजना पर विपक्ष ने तीखे तेवर अपनाते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू पर सदन को झूठे आंकड़े पेश कर गुमराह करने का आरोप लगाया।
प्रश्नकाल के तुंरत बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर द्वारा सदन में किम केयर के संबंध में आक्रामक अंदाज में बात रखी। इसके बाद मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए बड़ा खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि सरकार ने इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज (आईजीएमसी) शिमला और डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज, टांडा में हिमकेयर योजना का इंटरनल आडिट करवाया है, जिसमें करीब 110 करोड़ रुपये तक के संभावित घोटाले के संकेत मिले हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी किसी योजना में संदेह पैदा होता है, वहां सरकार जांच से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने एलान किया कि इस मामले की जांच विजिलेंस कर रही है और भ्रष्टाचारियों को जेल भेजा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने चौंकाने वाले उदाहरण देते हुए कहा कि जांच में ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां पुरुष मरीजों के नाम पर बच्चादानी से जुड़े बिल लगाए गए। इसके अलावा आंखों में एक्सपायरी डेट के लेंस डालने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि ये सभी संकेत योजना में गड़बड़ी के साथ भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं और इसकी विस्तृत जांच जारी है। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार हिमकेयर योजना को बंद नहीं करेगी, बल्कि इसे और बेहतर व पारदर्शी बनाया जाएगा।
साथ ही उन्होंने बताया कि मामले की विजिलेंस जांच भी करवाई जा रही है और हिमकेयर के दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि योजना का संचालन पहले जिस तरीके से होना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ।
खासकर प्राइवेट अस्पतालों की इम्पेनलमेंट प्रक्रिया और रोगी कल्याण समितियों (आरकेएस) में भी कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
हिमकेयर योजना के वित्तीय आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि हिमकेयर योजना का कुल आकार करीब 1100 करोड़ रुपये है। इसमें पूर्व भाजपा सरकार ने लगभग 441 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि वर्तमान सरकार अब तक 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है।
हालांकि, उन्होंने 1100 करोड़ रुपये के घोटाले के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अभी तक इंटरनल आडिट में करीब 100 करोड़ रुपये तक की अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
उन्होंने कहा कि दवाइयों की खरीद में किसी तरह की अनियमितता हो रही है तो कोई भी विधायक सरकार को सूचना दे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरी जांच जल्द पूरी कर सच्चाई सामने लाई जाएगी।





