एप्पल न्यूज, शिमला
हिमाचल प्रदेश में सेब का मौसम केवल एक फल उत्पादन का काल नहीं, बल्कि बागवानों की साल भर की मेहनत की कमाई का समय होता है।
ऐसे में सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय कि बिना लाइसेंस कोई भी आढ़ती सेब नहीं खरीद पाएगा, निश्चित रूप से स्वागत योग्य है।
वर्षों से यह देखा गया है कि कई बिना पंजीकरण वाले आढ़ती सीधे बागीचों में जाकर सेब खरीदते हैं और बागवानों को उचित मूल्य से वंचित करते हैं।

ठगी के कई मामले सामने आते हैं, लेकिन समय रहते इन पर कार्रवाई नहीं हो पाती। इस बार सरकार ने ऐसे मामलों पर लगाम कसने के लिए सख्ती का रुख अपनाया है।
मुख्य पहलू:
- पहली जुलाई से अर्ली वैरायटी सेब की आमद शुरू हो जाएगी।
- 500 से अधिक आढ़तियों को अब तक पंजीकृत किया जा चुका है।
- प्रत्येक आढ़ती को अपने लाइसेंस को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
- फ्लाइंग स्क्वॉड गठित कर दी गई हैं जो बागीचों व मंडियों में नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगी।
यह न केवल बागवानों को न्यायसंगत मूल्य सुनिश्चित करेगा, बल्कि मंडी प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा भी स्थापित करेगा। मार्किटिंग बोर्ड और एपीएमसी का यह संयुक्त प्रयास यदि सही ढंग से लागू किया जाए तो यह सेब कारोबार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
बागवानों के लिए संदेश: बिना लाइसेंस आढ़तियों से लेन-देन न करें। यदि कोई ऐसा आढ़ती आपको झांसे में लेने की कोशिश करे, तो तुरंत नजदीकी एपीएमसी या मार्किटिंग बोर्ड से संपर्क करें।
यह कदम केवल व्यापार की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि आपकी मेहनत की कीमत की रक्षा के लिए भी उठाया गया है।
यह निर्णय न केवल हिमाचल की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि सेब उत्पादकों को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब जरूरत है इसकी सख्त निगरानी और ईमानदारी से क्रियान्वयन की।







