एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश में दल-बदल की राजनीति पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में विधायकों के भत्ते व पेंशन संशोधन विधेयक 2026 पेश किया है।
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार अब दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किए गए विधायकों को पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनता के जनादेश को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
संशोधित विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि यह प्रावधान संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्य ठहराए गए विधायकों पर लागू होगा।

सरकार के मुताबिक वर्तमान नियमों में दल-बदल को हतोत्साहित करने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं था, जिससे ऐसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता रहा।
यही कारण है कि कानून में बदलाव की आवश्यकता महसूस की गई। यह संशोधन 14वीं विधानसभा और इसके बाद निर्वाचित होने वाले विधायकों पर लागू होगा।
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव से जुड़ी है, जब कांग्रेस के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। इसके चलते भाजपा के हर्ष महाजन राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।
पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर संबंधित विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया था। इसके बाद हुए उपचुनाव में कुछ नेता भाजपा टिकट पर जीतकर वापस विधानसभा पहुंचे, जबकि कई को हार का सामना करना पड़ा।
नए प्रावधान लागू होने के बाद पहली बार निर्वाचित और अयोग्य घोषित विधायकों को पेंशन से वंचित होना पड़ सकता है। हालांकि, जो विधायक पूर्व में विधानसभा सदस्य रह चुके हैं, उन्हें पहले की पात्रता के आधार पर पेंशन मिलती रहेगी।
विधेयक पर अभी विधानसभा में चर्चा होनी है। इसके पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही संशोधित कानून लागू होगा।
सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से भविष्य में दल-बदल की घटनाओं पर रोक लगेगी और प्रदेश में राजनीतिक स्थिरता मजबूत होगी।






