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हिमाचल प्रदेश सरकार ने डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य के अधिकार वापस लेने संबंधी कुलपति के आदेश को वापस ले लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सिद्धार्थ आचार्य ही विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार बने रहेंगे और उन्हें पद से जुड़े सभी वैधानिक, प्रशासनिक, वित्तीय व रिकॉर्ड संबंधी अधिकार प्राप्त रहेंगे।
सरकार की ओर से जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि कुलपति द्वारा 5 अक्तूबर 2026 को जारी आदेश के तहत सिद्धार्थ आचार्य की रजिस्ट्रार के तौर पर शक्तियां, कर्तव्य और कार्य समाप्त कर डॉ. डीपी शर्मा, निदेशक विस्तार शिक्षा को रजिस्ट्रार का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। सरकार ने इस आदेश को वापस लेते हुए इसे निष्प्रभावी घोषित कर दिया है।

आदेश में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कृषि, बागवानी एवं वानिकी अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि रजिस्ट्रार विश्वविद्यालय का वैधानिक अधिकारी है और उसकी नियुक्ति व पद से जुड़े मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। सरकार ने कहा कि कुलपति की आपात शक्तियों के तहत किसी पद पर नियुक्ति या पदाधिकारी को हटाने की कार्रवाई नहीं की जा सकती।
सरकार ने विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि सिद्धार्थ आचार्य को रजिस्ट्रार के वैध पदाधिकारी के रूप में मान्यता देते हुए उनके कार्यों में आवश्यक सहयोग करें। यदि 5 अक्तूबर के आदेश के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय की फाइलें, रिकॉर्ड, रजिस्टर, मुहर, चाबियां या अन्य सरकारी संपत्ति किसी अन्य अधिकारी ने अपने कब्जे में ली है, तो उसे तत्काल सिद्धार्थ आचार्य को वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।




