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शिमला की 9 झीलों का किया जाएगा सीमांकन -DC

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जिला वेटलैंड प्राधिकरण की कार्यशाला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में संपन्न

एप्पल न्यूज, शिमला

शिमला जिले में वेटलैंड (आर्द्रभूमि) संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में जिला वेटलैंड प्राधिकरण की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

इस कार्यशाला का उद्देश्य जिले की प्रमुख झीलों का सीमांकन (डिमार्केशन) कर उन्हें संरक्षित करना तथा उनके बेहतर प्रबंधन के लिए नीति निर्माण करना था।

शिमला जिले में वेटलैंड सीमांकन और संरक्षण को लेकर लिया गया यह निर्णय पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जल संरक्षण को मजबूत करने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस पहल से झीलों और जलस्रोतों की न केवल भौगोलिक सीमाएं तय होंगी, बल्कि उनके दीर्घकालिक संरक्षण की नीति भी बनाई जा सकेगी।

इसके अलावा, प्रशासन द्वारा स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने से यह कार्य और अधिक प्रभावी बन सकता है।

वेटलैंड सीमांकन एवं संरक्षण के प्रयास

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि शिमला जिले में कुछ महत्वपूर्ण झीलों का सीमांकन पहले ही पूरा किया जा चुका है, लेकिन अभी भी कई झीलों का सीमांकन किया जाना बाकी है।

सीमांकन किए जाने वाले जलाशय:

  1. तानी जुब्बड़ झील
  2. चंद्र नाहन झील
  3. बराड़ा झील
  4. कनासर झील
  5. धार रूपिन क्षेत्र की 5 झीलें

इन सभी 7 झीलों का सीमांकन कार्य जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित उपमंडलाधिकारी (ना०) और डीएफओ (डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर) को इन झीलों की भौगोलिक सीमाएं तय करने का कार्य सौंपा गया है। इस प्रक्रिया से भविष्य में इन जल स्रोतों के संरक्षण के लिए बेहतर योजनाएँ बनाई जा सकेंगी।

आर्द्रभूमि (वेटलैंड) संरक्षण के लिए प्रशासनिक प्रयास

  • उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत हर पंचायत में जल संरक्षण के लिए तालाबों का निर्माण किया जाएगा।
  • इन तालाबों को अधिक प्राकृतिक स्वरूप देने के लिए उनमें सीमेंट का उपयोग न्यूनतम रखा जाएगा, ताकि वे प्राकृतिक जल स्रोतों की तरह कार्य कर सकें।
  • स्थानीय लोगों की भागीदारी से वेटलैंड और झीलों के संरक्षण हेतु नियम बनाए जाएंगे, जिससे इन प्राकृतिक संसाधनों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।

कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी

1. हिमकोस्टे के वैज्ञानिक अधिकारी रवि शर्मा की प्रस्तुति

रवि शर्मा ने वेटलैंड की महत्ता और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि आर्द्रभूमि:

  • जल की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होती हैं।
  • वन्यजीवों और मछलियों के लिए प्राकृतिक आवास प्रदान करती हैं।
  • बाढ़ के पानी को अवशोषित करने और जल संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
  • शुष्क मौसम में जल आपूर्ति बनाए रखने में मददगार होती हैं।
  • वनस्पतियों और जीवों के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखती हैं।

उन्होंने वेटलैंड को “जैविक सुपरमार्केट” की संज्ञा दी, क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से विभिन्न जीव-जंतुओं और पौधों के लिए भोजन व आश्रय प्रदान करती हैं।

2. सलाहकार फॉरेस्ट्री एंड बायोडायवर्सिटी जीआईजेड (GIZ) के कुणाल भरत का संबोधन

कुणाल भरत ने सरकार की वेटलैंड संरक्षण नीतियों और नियमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि

  • आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून लागू हैं।
  • भारत सरकार द्वारा वेटलैंड (संरक्षण और प्रबंधन) नियम 2017 लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत झीलों और जल स्रोतों को संरक्षित करने के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं।
  • हिमाचल प्रदेश सरकार भी वेटलैंड की पहचान और संरक्षण के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

3. हिमकोस्टे के वरिष्ठ वैज्ञानिक रिशव राणा की जानकारी

रिशव राणा ने झीलों और वेटलैंड्स के सीमांकन की तकनीकी प्रक्रिया को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि

  • सीमांकन कार्य के लिए भू-उपग्रह (सैटेलाइट) इमेजरी, ड्रोन मैपिंग और जीआईएस (GIS) तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
  • झीलों की सीमाएं निर्धारित करने से भविष्य में इन जल स्रोतों पर अतिक्रमण को रोका जा सकेगा।
  • सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन क्षेत्रों को संरक्षित घोषित किया जाएगा।

इस अवसर पर कई उच्चाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं:अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक वर्मा, उपमंडलाधिकारी (ना०) रोहड़ू विजयवर्धनअन्य प्रशासनिक एवं वन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

इस पहल का महत्व और संभावित लाभ

  • झीलों और आर्द्रभूमि के सीमांकन से इन क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
  • प्राकृतिक जल संसाधनों का संरक्षण और पुनर्जीवन संभव होगा।
  • इससे बाढ़ नियंत्रण और जल संकट से निपटने में सहायता मिलेगी।
  • वेटलैंड्स में मौजूद समृद्ध जैव विविधता का संरक्षण किया जा सकेगा।
  • झीलों और तालाबों के संरक्षण से स्थानीय पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
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