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हिमाचल को -ऑपरेटिव बैंक पर “साईबर अटैक”, हिम पैसा का “सर्वर हैक” कर 11.55 करोड़ किया 20 खातों में ट्रासंफर

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एप्पल न्यूज, शिमला

यह घटना हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की साइबर सुरक्षा में हुई एक बड़ी सेंधमारी का मामला है, जिसने न केवल बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि डिजिटल बैंकिंग के प्रति लोगों के विश्वास को भी झटका दिया है।

आइए इस घटना को विस्तार से समझते हैं:

1. साइबर अटैक कैसे हुआ?

साइबर अपराधियों ने बैंक के एक ग्राहक – चंबा जिला के हटली शाखा के – मोबाइल फोन को पहले हैक किया।

इसके माध्यम से वे “हिम पैसा” नामक मोबाइल बैंकिंग एप्लिकेशन में लॉगिन करने में सफल रहे। इस एप्लिकेशन के ज़रिए ही वे बैंक के सर्वर तक पहुँच गए और फिर इस गंभीर साइबर हमले को अंजाम दिया।

यह साइबर अटैक 11 और 12 मई 2025 को हुआ, जब अधिकतर संस्थानों में अवकाश था। इसी का फायदा उठाकर ठगों ने पूरे सिस्टम को चकमा दिया और 11.55 करोड़ रुपये की भारी राशि 20 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी।


2. कैसे हुआ खुलासा?

बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों को नियमित रूप से आरबीआई (भारतीय रिज़र्व बैंक) से रिपोर्ट मिलती है। लेकिन 13 मई को छुट्टी होने के कारण यह रिपोर्ट समय पर नहीं आई।

14 मई को जब रिपोर्ट प्राप्त हुई, तब जाकर इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। बैंक प्रबंधन के होश उड़ गए और उन्होंने तुरंत मामले की सूचना पुलिस व साइबर क्राइम यूनिट को दी।


3. पुलिस व तकनीकी जांच:

  • शिमला के थाना सदर में शिकायत दी गई, जहाँ से जीरो एफआईआर दर्ज कर मामला साइबर पुलिस स्टेशन शिमला को सौंप दिया गया।
  • बैंक ने अपनी तरफ से चीफ इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर (CISO) को जांच प्रक्रिया में शामिल किया।
  • मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार की सीईआरटी-इन (Computer Emergency Response Team – India) को भी सूचित किया गया है, जो इस तरह की साइबर घटनाओं के लिए देश की नोडल एजेंसी है।
  • सीईआरटी-इन की टीम दिल्ली से शिमला आकर बैंक के डाटा सेंटर की गहन जांच करेगी।

4. बैंक की प्रतिक्रिया और बचाव:

बैंक के एमडी श्री श्रवण मांटा का बयान:

  • सभी ग्राहकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है।
  • जिन खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया था, उन खातों को फ्रीज (hold) कर दिया गया है, जिससे राशि वापस लाने की संभावना बनी हुई है।
  • बैंक के पास साइबर इंश्योरेंस है, जिससे किसी भी आर्थिक नुकसान की भरपाई की जा सकेगी।

भविष्य की तैयारी:

  • बैंक अब अपने कोर बैंकिंग सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है और जल्द ही इन्फोसिस के Finacle-10 प्लेटफ़ॉर्म पर शिफ्ट होगा। यह वही तकनीक है जिसका इस्तेमाल देश के प्रमुख बैंक – जैसे एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई – कर रहे हैं।
  • इससे साइबर सुरक्षा और भी मजबूत होगी।

महत्वपूर्ण सवाल

  1. क्या बैंकिंग एप्लिकेशन पर्याप्त सुरक्षित हैं?
    • यदि सिर्फ एक मोबाइल हैक करने से पूरे बैंक के सिस्टम तक पहुंचा जा सकता है, तो एप्लिकेशन डिज़ाइन और सुरक्षा स्तर पर पुनः विचार जरूरी है।
  2. ग्राहकों की व्यक्तिगत सुरक्षा कितनी जरूरी है?
    • ग्राहक की डिवाइस सुरक्षा अब पूरे बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा से जुड़ गई है।
  3. क्या सभी बैंकों को साइबर इंश्योरेंस लेना चाहिए?
    • यह घटना एक उदाहरण है कि कैसे साइबर इंश्योरेंस आर्थिक नुकसान से बचाने में मददगार हो सकता है।
  4. सीईआरटी-इन और साइबर क्राइम टीमें क्या कदम उठाएंगी?
    • वे यह जाँचेंगी कि हमला किस तरह से किया गया, कौन से सिस्टम कमजोर थे, और कौन-कौन इसमें शामिल हो सकते हैं।

यह घटना एक चेतावनी है कि आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि बैंक, ग्राहक और नीति-निर्माताओं – सभी की साझी जिम्मेदारी है।

हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की यह घटना न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक सबक है कि डिजिटल वित्तीय प्रणाली में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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