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IGMC मारपीट मामला, रेजिडेंट डॉक्टर कल 26 दिसंबर को “सामूहिक कैजुअल लीव” पर, 27 से “हड़ताल” की चेतावनी

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एप्पल न्यूज़, शिमला
शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (IGMC) एक गंभीर विवाद के केंद्र में आ गया है। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने एक टर्मिनेट किए गए डॉक्टर राघव की बहाली, डॉक्टरों की सुरक्षा और अस्पताल परिसर में हुई कथित हिंसक घटनाओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।

RDA ने घोषणा की है कि 26 दिसंबर 2025 को सभी रेजिडेंट डॉक्टर एक दिन की सामूहिक कैजुअल लीव पर रहेंगे। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो 27 दिसंबर सुबह 9:30 बजे से इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।
रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हाल ही में IGMC परिसर में एक गंभीर घटना घटी, जिसमें डॉक्टरों को भीड़ द्वारा डराने-धमकाने और कार्यस्थल की सुरक्षा भंग होने का आरोप लगाया गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि इस घटना से अस्पताल का कामकाज प्रभावित हुआ और स्वास्थ्यकर्मियों की जान को खतरा पैदा हुआ।

इसी क्रम में डॉक्टर राघव को कथित रूप से जान से धमकी मिलने और देश छोड़ने के लिए मजबूर किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इस मामले में RDA ने स्पष्ट रूप से एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
रेजिडेंट डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में सबसे अहम है डॉक्टर राघव की तत्काल बहाली।

डॉक्टरों का कहना है कि टर्मिनेशन आदेश अन्यायपूर्ण है और इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। इसके अलावा, अस्पताल परिसर में हुई तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

RDA का आरोप है कि पहले से चिन्हित की गई CCTV कवरेज और सुरक्षा खामियों को दूर नहीं किया गया, जिसके कारण यह गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई।
डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह चालू रहेंगी, ताकि किसी भी गंभीर मरीज को परेशानी न हो।

हालांकि, OPD, नियमित सेवाएं और वैकल्पिक ऑपरेशन थिएटर बंद रहने से आम मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
RDA के अनुसार, 26 दिसंबर को मुख्यमंत्री के साथ सुबह 9:45 बजे बैठक प्रस्तावित है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि इस बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। लेकिन यदि प्रशासन की ओर से ठोस आश्वासन या कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
यह मामला केवल एक डॉक्टर की बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा, सम्मान और कार्यस्थल की गरिमा से जुड़ा हुआ है।

IGMC जैसे प्रदेश के सबसे बड़े रेफरल अस्पताल में इस तरह की स्थिति उत्पन्न होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।

अब सबकी निगाहें 26 दिसंबर की बैठक पर टिकी हैं, जहां से यह तय होगा कि मामला बातचीत से सुलझेगा या प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं बड़े आंदोलन की ओर बढ़ेंगी।

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