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हिमाचल में अतिक्रमण करने वाले “पंचायत चुनाव” लड़ने से होंगे “अयोग्य”

हाईकोर्ट के फैसले के बाद शिमला प्रशासन का बड़ा आदेश

एप्पल न्यूज़, शिमला

हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों से पहले सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है।

जिला शिमला के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जो व्यक्ति सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किए हुए हैं या जिन्होंने ऐसे अतिक्रमण को नियमित कराने के लिए आवेदन किया है, वे पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माने जाएंगे।
यह आदेश 9 दिसंबर 2025 को जारी किया गया है, जो हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122(1)(c) के तहत लागू होगा।

इसके तहत सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य अथवा अन्य किसी भी पंचायत पद के लिए चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे।
इस निर्णय का आधार हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का हालिया फैसला है। उच्च न्यायालय ने CWP संख्या 3039 व 3040/2025 में गुरदेव बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य मामले में 20 मई 2025 को दिए गए फैसले में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को वैध ठहराने या नियमित कराने के लिए आवेदन करता है, तो उसे पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य माना जाएगा।

अदालत के इस फैसले को राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन द्वारा गंभीरता से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से यह आदेश जिला शिमला के सभी उपमंडल अधिकारियों, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर तथा ब्लॉक विकास अधिकारियों को भेजा गया है।

उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि आगामी पंचायत चुनावों के दौरान नामांकन प्रक्रिया में इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी अतिक्रमणकारी को चुनाव लड़ने की अनुमति न दी जाए।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच के समय उम्मीदवारों की भूमि से संबंधित स्थिति की भी जांच की जाएगी।

यदि किसी उम्मीदवार के खिलाफ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण या अतिक्रमण के नियमितीकरण का मामला सामने आता है, तो उसका नामांकन रद्द किया जा सकता है। इससे पंचायत चुनावों में कई संभावित उम्मीदवारों की दावेदारी समाप्त होने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और कानून के शासन को मजबूत करेगा।

इससे न केवल सरकारी भूमि की रक्षा होगी, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों के लिए नैतिक और कानूनी मानकों को भी ऊंचा किया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से अतिक्रमण एक गंभीर समस्या बनी हुई है और ऐसे में यह निर्णय एक कड़ा संदेश देता है कि कानून तोड़ने वालों को जनप्रतिनिधि बनने का अधिकार नहीं दिया जाएगा।
आगामी पंचायत चुनावों में यह आदेश अहम भूमिका निभाएगा और प्रशासन के साथ-साथ आम जनता की भी नजरें इस बात पर टिकी रहेंगी कि इसे जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।

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