शिमला चौपाल में शादी समारोहों पर सख्ती: DJ और शराब पूरी तरह प्रतिबंधित, उल्लंघन पर 1 लाख तक जुर्माना
एप्पल न्यूज़, शिमला
शिमला जिले के चौपाल क्षेत्र में सामाजिक आयोजनों को लेकर एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला लिया गया है। चौपाल क्षेत्र के सदर स्याणा खत ने सामूहिक सहमति से निर्णय लिया है कि अब शादी और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में DJ, बियर और शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
इसके साथ ही शादियों में जरूरत से ज्यादा सोना खरीदने की प्रथा पर भी रोक लगाई गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित परिवार पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
यह फैसला क्षेत्र में बढ़ती फिजूलखर्ची, सामाजिक तनाव और युवाओं में नशे की प्रवृत्ति को देखते हुए लिया गया है। स्याणा खत के प्रतिनिधियों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में शादियों में DJ की तेज आवाज, शराब सेवन और दिखावटी खर्च के कारण कई बार कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है।

कई परिवार सामाजिक दबाव में आकर अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे कर्ज और घरेलू तनाव बढ़ता है।
निर्णय के अनुसार अब विवाह और अन्य सामाजिक समारोह सादगी से संपन्न किए जाएंगे। DJ की जगह पारंपरिक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
शराब और बियर पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, ताकि आयोजनों में शांति बनी रहे और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
वहीं, “केवल जरूरी सोना” खरीदने की शर्त का उद्देश्य दहेज जैसी कुप्रथा और दिखावे पर रोक लगाना बताया गया है।
इस फैसले का क्षेत्र के बुजुर्गों और सामाजिक संगठनों ने खुलकर समर्थन किया है।
उनका मानना है कि यह कदम पहाड़ी समाज की पारंपरिक सादगी और सामूहिकता को मजबूत करेगा। कई ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के नियमों से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को राहत मिलेगी, जो अक्सर सामाजिक प्रतिस्पर्धा के चलते अनावश्यक खर्च करने को मजबूर हो जाते हैं।
हालांकि, फैसले को लेकर विरोध की आवाजें भी सामने आई हैं। कुछ युवाओं और कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि शादी जैसे निजी कार्यक्रमों में इस तरह की सख्ती व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश है।
DJ, कैटरिंग और होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों को आशंका है कि इससे उनकी आय पर असर पड़ेगा। इसके अलावा 1 लाख रुपये तक के जुर्माने को कई लोग अत्यधिक कठोर मान रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल यह स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय सामुदायिक सहमति पर आधारित है और इसका उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।
नियमों के क्रियान्वयन के लिए स्थानीय स्तर पर समितियां बनाई जाएंगी, जो निगरानी रखेंगी और किसी भी विवाद की स्थिति में समाधान निकालेंगी।
कुल मिलाकर, चौपाल क्षेत्र का यह फैसला हिमाचल के अन्य ग्रामीण इलाकों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। समर्थक इसे सामाजिक सुधार की दिशा में साहसिक कदम बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसके व्यावहारिक पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह निर्णय जमीन पर कितना प्रभावी साबित होता है और क्या अन्य क्षेत्र भी इसी राह पर चलते हैं।







