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सेब उत्पादकों के लिए अलर्ट, नौणी विश्वविद्यालय ने जारी की एडवाइजरी, बारिश के मौसम में बढ़ा रोगों का खतरा

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एप्पल न्यूज़, शिमला

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के चलते सेब के बगीचों में पत्ती झुलसा, पत्ती धब्बा, मार्सोनिना लीफ ब्लॉच तथा मृदा जनित रोगों का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पादप रोग विज्ञान विभाग ने सेब उत्पादकों के लिए विस्तृत परामर्श जारी किया है।
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, बागवानी विभाग के अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों की ऑनलाइन बैठक के बाद जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि वर्तमान मौसम में तापमान, अधिक आर्द्रता और पत्तियों पर लंबे समय तक नमी रहने से इन रोगों का तेजी से प्रसार हो सकता है। जिन बगीचों में पिछले वर्ष इन रोगों का प्रकोप रहा है, वहां अनुशंसित स्प्रे सारिणी के अनुसार समय पर फफूंदनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।


किसानों के लिए प्रमुख सलाह
बगीचों के अंदर और आसपास उगे खरपतवारों को नियमित रूप से हटाएं।
अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा, पत्ती झुलसा एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच के नियंत्रण के लिए आवश्यकता अनुसार मेटीराम 600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी का सुरक्षात्मक छिड़काव करें।
अधिक प्रकोप वाले क्षेत्रों में लस्टर, कैब्रियो टॉप, शमीर, लूना एक्सपीरियंस या अवतार जैसे अनुशंसित फफूंदनाशकों का बारी-बारी से प्रयोग करें।
व्हाइट रूट रॉट की रोकथाम के लिए वर्षा ऋतु की शुरुआत से पेड़ के चारों ओर 15–20 सेंटीमीटर गहराई तक कार्बेन्डाजिम 200 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी के घोल से 3–4 बार ड्रेंचिंग करें।
कॉलर रॉट के नियंत्रण हेतु तने से लगभग 30 सेंटीमीटर दूरी पर पूरे वृक्ष बेसिन में मैनकोजेब 600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी के घोल से ड्रेंचिंग करें।
सिल्वर लीफ कैंकर एवं अन्य कैंकर रोगों के नियंत्रण के लिए फल तुड़ाई के 24 घंटे के भीतर क्यूप्रोफिक्स डिस्प्रेस 1200 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी का छिड़काव करें।
महत्वपूर्ण सावधानी
विश्वविद्यालय ने किसानों को सलाह दी है कि अनुशंसित फफूंदनाशकों के साथ किसी भी कीटनाशी, सूक्ष्म पोषक तत्व, वृद्धि नियामक या हार्मोन को मिलाकर छिड़काव न करें। ऐसा करने से पौधों पर विषाक्त प्रभाव (फाइटोटॉक्सिसिटी), फलों पर रसेटिंग तथा अन्य विकार उत्पन्न हो सकते हैं। आवश्यकता होने पर इनका अलग-अलग छिड़काव करें।
यदि किसी बगीचे में रोग के लक्षण दिखाई दें या तकनीकी सलाह की आवश्यकता हो तो किसान रोगग्रस्त पौधों के फोटो के साथ अपनी समस्या hodmpp@uhf.ac.in पर भेज सकते हैं।

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