एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की भर्ती, नियमितीकरण, वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों से जुड़े मामलों को लेकर सभी विभागों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ताज मोहम्मद मामले तथा उससे जुड़े न्यायिक फैसलों के आधार पर आने वाले मामलों पर निर्णय संबंधित प्रशासनिक विभाग के स्तर पर ही लिया जाएगा। फील्ड स्तर का कोई भी अधिकारी प्रशासनिक विभाग की मंजूरी के बिना ऐसे मामलों में फैसला नहीं ले सकेगा।
कार्मिक विभाग की प्रधान सचिव एम. सुधा देवी की ओर से 18 अगस्त 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2026 को देविंदर कुमार एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य मामले में हिमाचल प्रदेश Recruitment and Conditions of Service of Government Employees Act, 2024 को निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट का यह फैसला CWP No. 3361 of 2025 और इससे जुड़े मामलों में आया था।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। पत्र के अनुसार SLP No. 24885/2026 में सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस फैसले के बाद हाईकोर्ट द्वारा कानून को निरस्त किए जाने का निर्णय बरकरार रहा।

ताज मोहम्मद मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
सरकार के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि देविंदर कुमार मामले का संबंध हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के लेख राम मामले (O.A. No. 3337/2016, 25 मई 2017) तथा हाईकोर्ट के ताज मोहम्मद मामले (CWP No. 2004/2017, 3 अगस्त 2023) से है।
ताज मोहम्मद मामले में संविदा आधार पर नियुक्ति और नियमितीकरण के बाद सेवा लाभ एवं वरिष्ठता से जुड़े अधिकारों का मुद्दा सामने आया था। बाद में इसी कानूनी स्थिति से जुड़े अनेक मामले हाईकोर्ट में पहुंचे। हाईकोर्ट के हालिया फैसलों में भी संबंधित मामलों को ताज मोहम्मद के फैसले के अनुरूप दोबारा विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
DDO समेत फील्ड अधिकारियों को निर्देश
सरकार ने अपने निर्देशों में कहा है कि ताज मोहम्मद मामले और उससे जुड़े मामलों में पारित निर्णयों के आधार पर विभिन्न विभागों में उत्पन्न मामलों की जांच और निर्णय केवल संबंधित प्रशासनिक विभाग के स्तर पर किया जाएगा।
इस संबंध में किसी भी फील्ड लेवल अधिकारी को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे मामलों में प्रशासनिक विभाग की पूर्व मंजूरी आवश्यक होगी।
सरकार ने इन निर्देशों को सभी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के साथ-साथ Drawing and Disbursing Officers (DDOs) को भी इनके कड़ाई से अनुपालन के लिए अवगत करवाने को कहा है।
हजारों कर्मचारियों के मामलों पर असर
हिमाचल हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के फैसले में 2024 के कानून को असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित कर निरस्त किया गया था। इस कानून के तहत नियमित नियुक्ति से पहले की संविदा सेवा को वरिष्ठता, वेतनवृद्धि और अन्य सेवा लाभों के संदर्भ में सीमित करने का प्रावधान था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य की अपील खारिज किए जाने के बाद अब ऐसे मामलों में विभागीय स्तर पर होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। सरकार के 18 अगस्त के नए निर्देशों से यह स्पष्ट हो गया है कि ताज मोहम्मद और उससे जुड़े न्यायिक फैसलों के आधार पर सेवा लाभ से संबंधित मामलों में अंतिम निर्णय फील्ड स्तर पर नहीं, बल्कि संबंधित प्रशासनिक विभाग ही लेगा।










