एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में हस्तक्षेप के विरोध में एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने सोमवार को प्रदर्शन किया। एसएफआई ने मांग उठाई कि CAG द्वारा चिन्हित 186 नियुक्तियों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र न्यायिक जांच करवाई जाए तथा विश्वविद्यालय की स्वायत्तता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।
एसएफआई ने कहा कि यह मामला महज राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में वर्ष 2020 से 2023 के बीच HPU में हुई 186 नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। संगठन के अनुसार CAG ने EWS प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता और अन्य दस्तावेजों के संबंधित जारीकर्ता संस्थाओं से सत्यापन का रिकॉर्ड उपलब्ध न करवाए जाने पर सवाल उठाए हैं।
एसएफआई ने कहा कि CAG रिपोर्ट में एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाया गया है, जिसमें आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी होने पर आपत्ति दर्ज की गई है। इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया में UGC के निर्धारित मानकों के पालन को लेकर भी रिपोर्ट में टिप्पणियां की गई हैं।
एसएफआई के मुताबिक इन सभी मामलों की वास्तविकता सामने लाने के लिए न्यायिक जांच आवश्यक है। संगठन ने कहा कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि नियुक्तियों में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं, दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।
एसएफआई ने स्पष्ट किया कि उसकी मांग HPU की स्वायत्तता समाप्त करने की नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। संगठन का कहना है कि शिक्षक भर्तियां विश्वविद्यालय के वैधानिक प्राधिकरणों के माध्यम से ही होनी चाहिए और UGC के नियमों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।
एसएफआई ने बताया कि 2 सितंबर को संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात कर 186 नियुक्तियों का मामला उठाया था। इस दौरान कुलपति की ओर से बताया गया कि विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार को लिखित प्रस्ताव भेजा है, जिसमें मामले की जांच के लिए न्यायिक समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है। एसएफआई ने राज्य सरकार से इस प्रस्ताव पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।
संगठन ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में यदि कोई कमी या अनियमितता सामने आती है तो उसका समाधान विश्वविद्यालय की स्वायत्तता समाप्त करना नहीं हो सकता। कमियों को दूर करने के साथ दोषियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और भर्ती प्रक्रिया को UGC के नियमों के अनुरूप पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
प्रदर्शन के माध्यम से एसएफआई ने चार प्रमुख मांगें उठाईं—CAG द्वारा चिन्हित 186 नियुक्तियों की न्यायिक जांच, HPU में शिक्षक भर्तियां विश्वविद्यालय द्वारा ही करवाना, UGC नियमों का सख्ती से पालन और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप बंद करना।
एसएफआई यूनिट सेक्रेटरी मुकेश राणा और यूनिट अध्यक्ष आशीष चौहान ने कहा कि गलत भर्ती का समाधान विश्वविद्यालय की स्वायत्तता खत्म करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करना है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।









