IMG_20260124_200231
previous arrow
next arrow

कार्रवाई- CBI ने ट्राई का अधिकारी रावत एक लाख रिश्वत के मामले में किया गिरफ्तार

IMG_20251207_105330
previous arrow
next arrow

एप्पल न्यूज, नाहन/शिमला/दिल्ली

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और कड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के वरिष्ठ शोध अधिकारी नरेंद्र सिंह रावत को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

यह मामला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से संबंधित है, जहां केबल ऑपरेटरों से जुड़े अनुपालन मामलों में कथित रूप से एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। यह घटना प्रशासनिक पारदर्शिता और ईमानदारी की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

घटना का विवरण

सीबीआई ने बताया कि आरोपी अधिकारी नरेंद्र सिंह रावत ने केबल ऑपरेटर से उसके अनुपालन मामलों में मदद करने और लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश न करने के बदले रिश्वत की मांग की थी।

केबल ऑपरेटर को तिमाही प्रदर्शन रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज सौंपने होते हैं, जिन्हें अधिकारी द्वारा जांचने और मूल्यांकन करने के बाद संबंधित मंत्रालय को भेजा जाता है। यदि इन दस्तावेजों में कोई कमी पाई जाती है, तो ऑपरेटर का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

रावत ने कथित तौर पर यह सुनिश्चित करने के लिए रिश्वत मांगी कि लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश न की जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में अन्य पांच लाइसेंस धारक केबल ऑपरेटरों की तिमाही रिपोर्ट के आकलन में भी उनका पक्ष लिया जाएगा।

सीबीआई की कार्रवाई

शिकायत प्राप्त होने के बाद, सीबीआई ने मामले की प्रारंभिक जांच की और सत्यापन के बाद दिल्ली में एक जाल बिछाया। जांच एजेंसी ने रावत को दिल्ली स्थित उनके कार्यालय में एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारी के बाद, सीबीआई ने आरोपी के दिल्ली और ग्रेटर नोएडा स्थित आवासीय और आधिकारिक परिसरों की तलाशी ली।

महत्वपूर्ण मुद्दे

इस घटना ने सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अधिकारियों की जवाबदेही के सवाल को फिर से उजागर किया है। ट्राई जैसे महत्वपूर्ण संस्थान, जो देश में दूरसंचार और प्रसारण सेवाओं को विनियमित करते हैं, पर आम जनता और उद्योग का भरोसा होता है। लेकिन इस तरह के मामले इस भरोसे को हानि पहुंचाते हैं।

सीबीआई की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न हो। यह कदम प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

भ्रष्टाचार से होने वाले नुकसान

भ्रष्टाचार न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को कमजोर करता है, बल्कि उद्योग जगत और निवेशकों के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है। इस तरह की घटनाएं, विशेषकर जब वे नियामक संस्थानों से जुड़ी हों, देश के आर्थिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।

इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है। सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी तंत्र और निगरानी की आवश्यकता है।

सीबीआई की इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों को सजा दी जाएगी।

इस तरह की कार्रवाइयां न केवल कानून का पालन सुनिश्चित करती हैं, बल्कि समाज में ईमानदारी और न्याय की भावना को भी मजबूत करती हैं।

Share from A4appleNews:

Next Post

घोटाला- ठियोग में 1.13 करोड़ के पेयजल घोटाले में जलशक्ति विभाग के 10 अधिकारी सस्पेंड, 5 JE, 3 SDO, 2 Exen पर गिरी ग़ाज

Fri Jan 3 , 2025
एप्पल न्यूज, शिमला हिमाचल प्रदेश सरकार ने ठियोग में पेयजल आपूर्ति से संबंधित घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है और पानी की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई जल शक्ति विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी डॉ. ओंकार चंद […]

You May Like

Breaking News