*राष्ट्रीय बैठक में सहकारी बैंकों के विलय और बंद किए जाने का हुआ विरोध, केंद्र से पुनर्विचार का किया गया आग्रह:संजय चौहान
एप्पल न्यूज, शिमला
राष्ट्रीय सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास समिति के संचालन बोर्ड की 179वीं बैठक दिल्ली में आयोजित की गई जिसमें पूरे देश से सहकारी समिति के निदेशक, बैंकों के चेयरमैन व उच्चाधिकारी उपस्थित हुए।
इस बैठक में कृषि एवं ग्रामीण विकास सहकारिता पर आए हुए मेज़बानो ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर संजय सिंह चौहान चेयरमैन हिमाचल प्रदेश कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक ने अपने विचारों के रूप में सहकारिता के उत्थान के लिए बहुत से सुझाव रखे जिन्हें सभी महानुभावों द्वारा सराहा गया।
चौहान ने बताया कि हिमाचल एक मात्र ऐसा राज्य है जिसमें 3 लाख तक के कृषि ऋण पर ब्याज में 50% की छूट दी गई है।

इसका श्रेय मुख्यमंत्री को जाता है जिन्होंने ने किसानों के हित के लिए यह प्रावधान उपलब्ध करवाया ताकि किसान अपने पैरों पर खड़ा हो सकें और स्वावलंबी बन सकें!
संजय सिंह चौहान ने यह भी बताया कि किसानों का विश्वास अन्य बैंकों के अलावा केवल सहकारी बैंकों और सहकारी समितियों पर है और अधिकतर किसान सहकारिता से ही लोन लेते हैं और समय रहते अदायगी भी करते हैं।
यह भी सत्य है कि कई बार मौसम की मार और पानी की किल्लत से उपज भरपूर न होने के कारण घाटा पढ़ने की स्थिति में उन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और वह कर्जे में डूब जाते हैं लेकिन उन्हें इस स्थिति से निकालना भी सहकारी समिति या बैंक की जिम्मेदारी बन जाती है!






