हिमाचल किसान सभा का 17वां राज्य सम्मेलन 13-14 अक्टूबर को चाटी में, हजारों लोगों के शामिल होने का दावा


13 अक्टूबर को रामपुर में किसानों, बागवानों और मजदूरों की रैली; विभिन्न क्षेत्रों से हजारों लोगों के शामिल होने का दावा
एप्पल न्यूज़, रामपुर बुशहर

हिमाचल किसान सभा का 17वां राज्य सम्मेलन 13 और 14 अक्टूबर 2026 को किसान मजदूर भवन, चाटी (रामपुर) में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन के पहले दिन 13 अक्टूबर को किसानों, बागवानों और मेहनतकश जनता के विभिन्न मुद्दों को लेकर रामपुर में रैली और आम सभा का आयोजन किया जाएगा। आम सभा को अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले, हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंघा और राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर संबोधित करेंगे।
सम्मेलन और रैली की तैयारियों को लेकर किसान सभा की ओर से गांव स्तर पर बैठकें आयोजित की जा रही हैं। किसान सभा के राज्य सचिव देवकी नंद, जिला अध्यक्ष रणजीत ठाकुर और प्रेम चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जबकि किसानों की आय में लगातार कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि कृषि में उत्पादन लागत बढ़ने से खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है और आर्थिक संकट के चलते कई किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं।
किसान सभा के नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिका और न्यूजीलैंड के साथ व्यापारिक समझौतों के माध्यम से कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने खाद्य वस्तुओं, चीनी, रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, महंगाई के कारण आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और लोगों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन रहा है, लेकिन इसका नाम बदलकर ‘जी राम जी’ किए जाने के बाद ग्रामीण लोगों को रोजगार मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। किसान सभा के नेताओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
प्रदेश सरकार की नीतियों पर भी उठाए सवाल
किसान सभा के नेताओं ने प्रदेश सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दूध उत्पादकों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा है और कई मामलों में दो-दो महीने बाद पेमेंट की जा रही है। उन्होंने स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर भी चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि इसके माध्यम से बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
नेताओं ने कहा कि परियोजना प्रभावित किसान आज भी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इनमें एक प्रतिशत रॉयल्टी, धूल के कारण फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा, मकानों में आई दरारों के लिए राहत, एकमुश्त राशि और रोजगार जैसी मांगें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों का समाधान किया जाना जरूरी है।
कई क्षेत्रों से किसानों और मजदूरों के पहुंचने की उम्मीद
किसान सभा के अनुसार, 13 अक्टूबर को रामपुर में आयोजित होने वाली रैली में निरमंड, रामपुर, नारकंडा, ननखड़ी, आनी, करसोग और किन्नौर सहित विभिन्न क्षेत्रों से किसान, बागवान और मजदूर भाग लेंगे। किसान सभा ने रैली में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई है।
सम्मेलन में किसानों, बागवानों, मजदूरों और ग्रामीण जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। किसान सभा के नेताओं ने इन मुद्दों को लेकर व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए गांव स्तर पर संपर्क और बैठकों का सिलसिला जारी रखा है।

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